VIDEO: 22 साल की आयशा खान बनीं एक दिन की ब्रिटिश उच्चायुक्त

आज के दौर में भारत के बच्चे इतने होनहार हैं की दुनिया भर में आज इनका नाम रोशन होता ही रहता है| देश भर में जहां अर्थव्यवस्था के चलते लोग बेहाल और परेशान नज़र आ रहे हैं वहीँ देश के बच्चे दुनिया भर में अपना नाम करने में पीछे नहीं हट रहे हैं लेकिन इन सब की ख़ास बात तो यह है कि और बच्चो की तरह आज मुसलि’म बच्चे सबसे आगे हैं और अपना नाम रोशन कर रहे हैं| एक तरफ जहा मु’सलमा’नों को लेकर उनके बच्चों की पढ़ाई को लेकर जो गलत धारणा’ये फैलाई जाती हैं|

वहीँ आज यह बच्चे अपनी कौशलता से अपनी प्रतिभा से लोगों की वो छोटी सोच को गलत साबित कर अपना नाम रोशन कर रहे हैं| बता दें कि आज इन सब के चलते उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की 22 साल की आयशा खान अपनी कुशलता से सबको हैरान कर दिया है| दरअसल 4 अक्टूबर को एक दिन के लिए आयेशा भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त बनाई गईं। इस पर आशया ने कहा कि, मैं खुशकिस्मत थी जो मुझे ये अवसर मिला।

जब एक दिन के लिए भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त बनीं गोरखपुर की आयशा खान ने हाईकमीशन के आला अधिकारियों से उनके कामकाज को लेकर कुरदते सवाल दागने शुरू किए तो भारत में ब्रिटेन के उच्चायुक्त सर डोमिनिक एसक्वीथ भी हैरत में पड़ गए।

दुनिया और जिंदगी के सरकारों को लेकर शायद उसकी जागरूकता और संजीदगी ही यह वजह रही कि आयशा ने महानगरीय पृष्ठभूमि की लड़कियों को मात देते हुए एक दिन के लिए ब्रिटिश उच्चायुक्त बनने की प्रतिस्पर्धा में बाजी मारी।


बता दें कि ब्रिटेन की एक दिन की उच्चायुक्त बनीं आयशा ने ब्रिटिश उच्चायुक्त के सरकारी निवास पर दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि यह कामयाबी वाकई सपने के सच होने जैसा है।

गोरखपुर शहर के शिवपुर शहबाजगंज की रहने वाली आयशा कहती हैं कि केवल महानगरों की नहीं बल्कि छोटे शहरों और कस्बों की लड़कियों में भी बड़े मुकाम छूने का जज्बा और क्षमता है। इन लड़कियों को तलाश है तो बस मौके की जो उन्हें अभी कम मिल पाते हैं।


वहीँ आयशा इस लिहाज से खुद को काफी खुशकिस्मत मानती हैं कि गोरखपुर जैसे शहर की पृष्ठभूमि में भी उनके माता-पिता ने उन्हें पढ़ाई लिखाई की पूरी सुविधा और आजादी दी। खासकर उनके दादा ने बेहद प्रोत्साहित किया और इसीलिए परिवार ने दिल्ली विश्वविद्यालय के खालसा कालेज में दाखले के लिए हिचकिचाए नहीं|

इसी के चलते आयशा कहती हैं कि उन्हें तो भरोसा ही नहीं था कि इतने बड़े स्तर की प्रतिस्पर्धा में उनके लिए कोई जगह भी होगी। मगर इसके नतीजों के बाद वे छोटे शहरों और गांव कस्बों की लड़कियों से यही कहेंगी कि अपने लक्ष्य की ओर वे हौसले के साथ बढ़ेंगी तो कामयाबी की मंजिल जरूर मिलेगी|


जानकारी के लिए बता दें कि 11 अक्टूबर को मनाए जाने वाले इंटरनेशनल डे ऑफ द गर्ल चाइल्ड के तहत इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। जिसे जीत कर आयशा खान एक दिन के लिए भारत में ब्रिटेन की उच्चायुक्त बनीं थीं|

जानकारी के मुताबिक़ इस प्रतियोगिता में 18 से 23 वर्ष की लड़कियां हिस्सा ले सकती हैं। इस प्रतियोगिता को जीतकर 22 साल की आयशा खान ने 4 अक्टूबर को ब्रिटेन के उच्चायुक्त के रूप में काम किया।

साभारः #DainikJaagran