मुसीबत में फँसा सऊदी अरब, मानवाधिकारों को लेकर 36 देशों ने दिया तगड़ा झटका, जानिए क्या हुआ ?

सऊदी शाह अब्दुल्लाह निधन होने के बाद शाह सलमान ने गद्दी संभाली थी. गद्दी संभालने के साथ ही शाह सलमान ने अपने भतीजे मोहम्मद बिन नायेफ को हटाकर अपने बेटे मोहम्मद बिन सलमान को क्राउन प्रिंस बना दिया था. मोहम्मद बिन सलमान ने क्राउन प्रिंस की गद्दी संभालते ही सत्ता में कई बड़े बदलाव किये. सऊदी प्रिंस ने कई बड़ी राहत और कानून में छुट सऊदी निवासियों को दी है. इसी क्रम में बिन सलमान ने महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाजत, स्टेडियम में खेल देखने और सिनेमा खोलने की इजाज़त, समुद्र किनारों पर अकेले जाने जैसी इजाजत दी गई.

इसके आलावा मोहम्मद बिन सलमान ने विदेश नीति से लेकर हर तरफ बदलाव करना शुरू कर दिया, दशकों से बने नियमों की अनदेखी भी की जाने लगी. बिन सलमान के इन बदलवों ने सऊदी अरब की बुनियादों को हिलाकर रख दिया. नतीजा देश में अले सऊदी शासन के खिलाफ विरोध के सुर तेज होने लगे.

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सऊदी कानूनों के अनुसार देश के किसी भी नागरिक को शाही परिवार के फैसले पर सवाल करने और शाही परिवार के खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं है. इसी के चलते सऊदी शासन ने अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज़ को बड़ी बेहरमी के साथ दबाना शुरू कर दिया.

इसी के चलते सऊदी अरब दुनिया के तमाम देशों के निशाने पर आ गया. सऊदी द्वारा मानवधिकारों का खुल्लमखुल्ला उलंघन करने से उसे आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) की गुरुवार को जेनेवा में हुई बैठक में सऊदी को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा.

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बैठक के दौरान 36 देशों ने सऊदी अरब की सरकार की जमकर आलोचना की. बैठक में इन देशों द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र पढ़ा गया जिसमें सऊदी अरब में महिला मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर हो रहे अत्या’चार की भी कड़ी आलोचना की है. इन देशों में यूरोपीय संघ के सदस्यों के साथ ऑस्ट्रेलिया, आइसलैंड, न्यूजीलैंड, मोनाको, नॉर्वे और कनाडा शामिल हैं.

यूएनएचआरसी की इस बैठक के दौरान सभी राष्ट्रों ने संयुक्त रूप से सऊदी सरकार की जेल में बंद और प्रता’ड़ना की शिका’र हो रही महिला कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा करने की मांग भी की है. सऊदी सरकार ने इन्हें महिलाओं के अधिकार के लिए आवाज़ उठाने के चलते केस दर्ज करके जेल में डाल दिया है.