कानूनी तौर पर 430 दलितों ने कबूला इस्लाम धर्म, भेदभाव से थे नाराज

नई दिल्ली: तमिलनाडु के कोयंबटूर में 430 से ज्यादा दलितों ने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म अपना लिया है और अभी 3000 से भी ज्यादा लोग इसकी प्रक्रिया में लग चुके हैं। इन दलितों का कहना है की हिंदू धर्म में उनके साथ जाति के नाम पर बहुत भद्दा मजाक हुआ है। उनका आरोप है कि कहीं भी जाएं, उन्हें उनकी जाति की वजह से अपमानित महसूस करना पड़ता था और इस भेद भाब के चलते सरकारी अधिकारी भी उनकी शिकायतें अनसुना कर देते हैं।

3000 दलित और मुसलमान बनने की राह पर

बता दें इतने बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के पीछे एक दीवार का गिरना बताया जा रहा है, बीते 2 दिसंबर 2019 को, भारी बारिश के दौरान मेट्टुपलायम और आसपास के इलाकों में बहुत भारी बारिश हुई थी। और उस बारिश में एक दीवार ढह गई, जिसकी चपेट में तीन मकान भी आ गए थे। उस हादसे में 17 लोगों की मौ’त हुई थी।

इस दौरान हादसे में मा’रे सभी लोग दलित थे और उस इलाके के दलित उस दीवार के ‘भेदभाव की दीवार’ होने का दावा करते हैं। इस हादसे ने कई दलितों को अंदर से तोड़ दिया। और उनका दावा है कि उनके साथ हमेशा से भेदभाव होता आया है। इस हादसे के बाद दलित समुदाय के करीब 3,000 लोगों ने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने का ऐलान कर दिया।

तमिल पुलिगल कच्ची के प्रदेश सचिव इल्लावेनिल ने बताया कि 430 लोगों ने कानूनी तौर पर इस्लाम धर्म अपना लिया है और कई लोग धर्मांतरण की प्रक्रिया में शामिल हैं।

वही हिन्दू धर्म छोड़ कर इस्लाम कुबूल करने वाले सरथ कुमार नाम ने अपना नाम बदलकर अब्दुल्ला रख लिया,अब्दुल्लाह ने बताया जब हमारे 17 लोग म’र चुके थे, हमारे लिए किसी हिंदू ने आवाज़ नहीं उठाई। केवल मुस्लिम भाई हमारे साथ खड़े होकर हमारा साथ दिया और इसका विरोध किया।

वही मोहम्मद अबूबकर, जो इस्लाम अपनाने से पहले मार्क्स के नाम से जाने जाते थे, उन्होंने कहा की हमने जाति के नाम पर हमेशा होने वाले अन्याय और छुआछूत की वजह से इस्लाम धर्म अपनाया है। क्योकि गरीब दलित मंदिर या मां दुर्गा माता के मंदिर में नहीं जा सकता। जबकि हम किसी भी मस्जिद में आराम से जा सकते हैं। वहां कोई भेद भाव नहीं है।

मोहम्मद अबूबकर ने कहा की मस्जिद में मुझे कोई नहीं रोकता मैं सभी स्तर के लोगों के साथ वहां अल्लाह के लिए नमाज पढ़ता हूं। लेकिन क्या आप मुझे मरियममन देवी का मंदिर में प्रवेश करने और भगवान की पूजा करने की अनुमति देंगे? नहीं देते।