VIDEO: गृहमंत्री अमित शाह का ऐलान, आ’र्म्स ए’क्ट, एनडीपीएस, IPC और CrPC में करेंगे बदलाव

नई दिल्लीः केंद्र की मोदी सरकार ब्रिटिश काल के बनाए गए आईपीसी इंडियन पीनल कोड) और सीआरपीसी (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर) में बड़ा बदलाव करने जा रही है। यह कहना है देश के गृहमंत्री अमित शाह (amit shah) का पुलिस मुख्यालय में आयोजित 47वीं अखिल भारतीय पुलिस विज्ञान कांग्रेस के शुक्रवार को समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो ने आइपीसी, सीआरपीसी में संशोधन का मसौदा तैयार कर गृह मंत्रालय को भेज दिया है।

livehindustan में छपी खबर के अनुसार, अमित शाह ने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत ने इन कानूनों को भारत पर शासन करने के लिए बनाया था, न की नागरिको को लिए जबकि हमारी प्राथमिकता इस देश के नागरिक और गरीब से गरीब व्यक्ति हैं, जिन्हें सुरक्षा प्रदान करने के साथ उन्हें इसका आभास भी कराना है। मौजदा जरूरतों के मुताबिक इन कानूनों में आमूलचूल परिवर्तन किया जाएगा।

आईपीसी और सीआरपीसी में बदलाव को लेकर कानूनी विशेषज्ञों व राज्यों से मांगे सुझाव

पुलिस मुख्यालय में आयोजित पुलिस साइंस कांग्रेस के समापन सत्र में शाह ने कहा कि पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ब्यूरो ने आईपीसी, सीआरपीसी में संशोधन का मसौदा तैयार कर गृह मंत्रालय को भेज दिया है। वही उन्होंने आगे कहा की ऐसे कानून सौ-डेढ़ सौ वर्षों में एक बार बदले जाते हैं। इन कानूनों को आधुनिक संदर्भो में सरल, सुचारु और पब्लिक सेंट्रिक कैसे बनाया जाए।

इसके लिए प्रत्येक राज्य के पुलिस महानिदेशक से लेकर बीट कांस्टेबल तक गृह मंत्रालय को अपने सुझाव देना होगा। हलाकि इन कानूनों में बदलाव के मसौदे को वेबसाइट पर भी सार्वजनिक किया जाएगा। इसके लिये कानूनी विशेषज्ञों व राज्यों से भी सुझाव आमंत्रित किये गए हैं।

उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में पुलिस विश्वविद्यालय नहीं है, वहां इस विश्वविद्यालय से सं’बद्ध कॉलेज स्थापित किया जाएगा। कक्षा दस उत्तीर्ण कर चुके जो बच्चे पुलिसिं’ग में अपना करियर बनाना चाहते हैं, वे इस विश्वविद्यालय और उससे संब’द्ध कॉलेजों में पढ़ सकते हैं। और जो छात्र यहां से पढ़कर निकलेंगे उन्हें पुलिस भर्ती में प्राथमिकता मिलेगी क्योंकि वे रेडीमेड मै’टीरिय’ल होंगे।

वही गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में क्रि’मि’नल्स को सजा दिलाने का प्रतिशत बेह’द कम है। और इस समस्या से निपटने के लिये केंद्र सरकार नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी बनाने जा रही है। सात साल से ज्यादा सजा वाले संगी’न आ’पराधि’क मामलों में फॉ’रेंसि’क सा’क्ष्य जुटाना जरुरी होगा। साथ ही राज्यों में इस यूनिवर्सिटी से सं’बद्ध कॉलेज होंगे। इसके लिये राज्यों को अलग से खर्च नहीं करना होगा। बल्कि, वे किसी साइंस कॉलेज को भी फॉ’रेंसि’क कॉलेज में बदल सकते हैं।

 

इसके अलावा राज्यों में मॉडस ऑ’परें’डी ब्यूरो स्थापित किया जाएगा। एफआईआर दर्ज होते ही उस अपरा’ध में अपनाई गई मॉडस ऑपरेंडी ब्यूरो के पास पहुंच जाएगी। जिन मामलों में सजा होगी, उसका ब्योरा भी ब्यूरो के पास भेजा जाएगा। ब्यूरो उसका एनालिसिस करेगा कि इस तरह के अ’परा’धों से कैसे निप’टा जाए।