50 लाख लोगो ने गंवाई नौकरी, इस बड़ी रिपोर्ट से हुआ खुलासा, मोदी सरकार के पास जवाब नहीं

केंद्र की सत्ता में आने के लिए भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी ने कई तरह के बड़े-बड़े वादे किये थे. प्रचार के दौरान भी मोदी ने देश की जनता को कई सपने दिखाए और कई वादे किये थे. ऐसा ही एक दावा बीजेपी ने रोजगार को लेकर कहा था. बीजेपी ने कहा था कि उनकी सरकार हर साल भारत में दो करोड़ नौकरियां देगी लेकिन अभी तक ऐसा कुछ तो नहीं हुआ बल्कि जो हुआ है वह इसके उल्ट है.

दरअसल देश में तेजी से बढ़ रही बेरोजगारी को लेकर एक रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है. इस रिपोर्ट के अनुसार मोदी सरकार के कार्यकाल के पिछले दो सालों में करीब 50 लाख लोगों ने अपनी नौकरियां खो दी है.

यह सनसनीखेज दावा द स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया (SWI) 2019 की रिपोर्ट में किया गया है. बेंगलुरु की अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी ने मंगलवार को इस रिपोर्ट को जारी किया है.

रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 से लेकर साल 2018 के बीच करीब 50 लाख बेरोजगार हुए. बताया गया है कि नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी के साथ ही देश में बेरोजगारी बढ़ने की शुरुआत हुई और लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है.

हालांकि रिपोर्ट में आगे यह भी कहा गया है कि नौकरी कम होने और नोटबंदी के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं हो पाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार उच्च शिक्षा ग्रहण कर चुके लोग और कम पढ़े लिखे लोग दोनों बेरोजगारी के शिकार हुए हैं. भारत की लेबर मार्केट पर जारी इस रिपोर्ट का आधार कन्ज्यूमर पिरामिड सर्वे रहा है.

यह सर्वे सेंटर फॉर मॉनिटरिंग द इंडियन इकॉनमी (CMIE-CPDX) द्वारा करवाया गया है. CMIE मुंबई की एक बिजनस इनफॉर्मेशन कंपनी है साथ ही यह स्वतंत्र रूप से काम करने वाला थिंक टैंक भी है.

रिपोर्ट के अनुसार साल 2011 के बाद से ही तेजी के साथ बेरोजगारी बढ़ रही है. लेकिन साल 2016 में की गई नोटबंदी के बाद उच्च शिक्षा धारकों के साथ कम पढ़े लिखे लोगों की नौकरियां छीन गई है और उन्हें मिलने वाले काम के अवसर भी कम होते जा रहे है.