कौन सा इस्लामि’क कानू’न कब कहां और कैसे लागू होगा, सुप्रीम कोर्ट में हो सकता है साफ, ना’बालि’ग मुस्लि’म लड़की का मामला

मुस्लि’म लड़की का अपनी मर्जी से विवाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट से एक मामला सामने आया है जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट ने गृ’ह सचिव को तलब किया है| सुप्रीम कोर्ट ने नाराज’गी भरे लहजे में कहा है कि सरकार को ऐसे मामले में फर्क नहीं पड़ता है इसलिए गृ’ह सचिव 23 सितंबर को हाजिर हों| दरअसल यह मामला एक मुस्लि’म ना’बालि’ग लड़की का है जिसने अपनी मर्जी से विवाह किया था लेकिन हाईकोर्ट ने उसका विवाह खारिज कर दिया और लड़की को नारी निकेतन भेज दिया|

इसके बाद लड़की ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि रजोस्व’ला प्यूब’र्टी होने के बाद मुस्लि’म लड़की को शादी का अधिकार मिल जाता है| उसने मुस्लि’म कानू’न के हिसाब से निकाह किया है और अपनी वैवाहि’क जिंदगी जीने को आजाद है| इसी आधार पर लड़की ने शादी की तय संवै’धानि’क उम्र 18 साल होने से पहले किए गए अपने विवाह को वैध घोषि’त करने की गुहा’र लगाई|

इसी के साथ अब सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहम’ति दे दी है| सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि वह शादीशुदा है, ऐसे में उसे दां’प’त्य जीवन बसर करने की इजाजत दी जाए|

आपको बता दें कि यह लड़की उत्तर प्रदेश के अयोध्या की रहने वाली है| सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एनवी रमणा जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस अजय रस्तोगी की बेंच ने इस मामले में दाखिल अर्जी पर सुनवा’ई के दौरान इसे विस्तार से सुनने के लिए सहमति दी है और यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि क्यों ना याचिकाकर्ता को इसकी इजाज़’त दी जाए|

आपको बता दें कि शादी के वक्त लड़की की उम्र 16 साल बताए जाने के बाद निचली अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि लड़की ना’बालि’ग है ऐसे में उसे शेल्ट’र हो’म भेजा जाए| इसके बाद लड़की ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता लड़की ना’बालि’ग है और वह अपने माता पिता के साथ नहीं रहना चाहती लिहाजा उसे शेल्ट’र होम में भेजने का आदेश सही है, इसी आदेश के चलते हाईकोर्ट ने शादी को शू’न्य करार दे दिया| वहीं दूसरी ओर इस लड़की ने अपने वकील दु’ष्यं’त पाराश’र के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हाईकोर्ट इस त’थ्य को मानने में विफल रहा है कि उसका निका’ह मु’स्लि’म कानून के अनुसार हुआ है|

बता दें कि याचिका में लड़की ने अपने जीने धार्मि’क मान्य’ता’ओं का पालन करने और स्वतंत्र’ता के अधिकार की रक्षा के लिए दली’ल दी है कि वह एक युवक से प्रेम करती है और इस साल जून में मुस्लि’म कानून के अनुसार उनका निका’ह हो चुका है| वहीँ दूसरी ओर इस निका’ह के बाद लड़की के पिता ने लड़के के खिला’फ अ’पहर’ण का माम’ला दर्ज कराया था|

लड़की के पिता ने पुलिस को दर्ज कराई गई शिकायत में कहा कि एक युवक ने अपने साथियों के साथ मिलकर उसकी बेटी का अ’पहर’ण कर लिया है| हालांकि लड़की ने मजिस्ट्रे’ट के सामने दिए गए अपने बयान में कहा है कि उसने उस व्यक्ति से अपनी म’र्जी से शादी की है और वह उसके ही साथ रहना चाहती है|

साभारः #NDTVIndia