VIDEO: आजतक की स्टार एंकर अंजना ओम कश्यप की इस बेशर्मी पर कौन बात करेगा?

चौतरफा आलोचना के बाद आजतक की स्टार एंकर अंजना ओम कश्यप का पत्रकारिता का धर्म जग गया है। अंजना ओम कश्यप अपना कैमरा और माइक लेकर मुजफ्फरपुर के अस्पताल के आईसीयू में घुस गयी हैं और वहाँ सीमित संसाधनों के माध्यम से बच्चों का इलाज कर रहे डाक्टर्स और नर्सों को परेशान कर रही हैं और अपने पत्रकार , कैमरा और माइक के दंभ को दिखाकर उनको डरा रही हैं। आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप अपनी इस रिपोर्टिंग में साफ-साफ कह रही है कि वो अस्पताल की आईसीयू में है।

मैडम इतनी साफ लफ्जो में पत्रकारिता का धर्म निभा रही है। आपको और हमें समझने में कोई चूक न हो. वो रिपोर्टिंग के नाम पर लगभग चीखने के अंदाज में बोलती जा रही हैं. उन्हें विजय चौक और एक अस्पताल की आईसीयू में कोई फर्क समझ नहीं आ रहा।

विजुअल्स में बच्चे जैसे-तैसे हैं. परिजन भी अस्त-व्यस्त हैं. न तो इनकी निजता का कोई सम्मान है और न ही आईसीयू की शर्तों की कोई परवाह. लग ही नहीं रहा कि ये देश की एक अनुभवी और सबसे तेज कहे जानेवाले चैनल की एंकर हैं. उन्हें इस बात की बेसिक समझ नहीं है कि आईसीयू में कैसे व्यवहार करना होता है?

बता दें मैडम अंजना ओम कश्यप ये एक बच्ची के ईलाज के लिए डॉक्टर को फटकार कर मीडियाकर्मी से कहीं ज्यादा सोशल एक्टिविस्ट का काम कर रही हैं. लेकिन उनके ऐसा करने से आईसीयू का माहौल और मरीजों पर क्या असर पड़ता है, इसकी कोई परवाह नही. सुनते हुए लग रहा है कि किसी और चैनल से पिछड़ जाने की हताशा है जिसे वो दूसरे टैन्ट्रम के जरिए भरपाई करना चाह रही हों।

अगर कोई नया रिपोर्टर या ट्रेनी होते तो आप कह सकते थे कि इन्हें उतनी समझ नहीं है. लेकिन ये अपने मीडिया करिअर में न जाने कहां-कहां और कितनी आईसीयू में गयी होंगी. क्या वो दिल्ली के किसी भी अस्पताल की आईसीयू में ऐसा कर सकती हैं और उन्हें ऐसा करने की इजाजत मिल जाती?

मुजफ्फरपुर के इस अस्पताल की आईसीयू में वो जो कर रही हैं, वो न केवल बेशर्म हरकत है बल्कि नियमों का सरेआम उल्लंघन है. अस्पताल को चाहिए कि मरीजों के बीच इस तरह की हरकत करने पर रोक लगाए, पारदर्शिता के नाम पर मीडिया को बेशर्मी करने से रोका जाये।

आईसीयू में कार्यरत डॉक्टर से चैनल की मीडियाकर्मी का डपटकर पूछना कि- डॉक्टर साहब ! एक मिनट आप कहां जा रहे हैं, क्या ये एक पेशेवर मीडियाकर्मी का काम है? वो जब खुद देख रही हैं कि दो-चार मिनट के भीतर बच्चे की मौत हो जा रही है तो ऐसे बेतुके सवाल करना, अपने सवाल के जवाब देने के लिए मजबूर करना, ये कैसी संवेदनशीलता है ?

चूंकि डॉक्टर से लेकर अस्पताल तक के सारे लोग अपने मोर्चे पर विफल रहे हैं और अभी भारी प्रेशर में हैं, उन्हें दर्शकों के आगे विलेन बनाया जाना आसान है. लेकिन एक डॉक्टर जब अपने काम में लगा हुआ है, उसे इस तरह उलझाना क्या उसी बच्चे के खिलाफ की जानेवाली हरकत नहीं है जिनके लिए वो लड़ती नजर आ रही हैं ?

साभार: #lokvani