आत्मनिर्भर पैकेज: 20 लाख करोड़ के पैकेज से अडानी-अंबानी मालामाल, मिला ये फायदा

आत्मनिर्भर पैकेज: 20 लाख करोड़ के पैकेज से अडानी-अंबानी मालामाल, मिला ये फायदा

नई दिल्ली: बीते दिनों पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर पैकेज का एलान किया था, जिसके तर्ज पर आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पांचवें चरण में राहत पैकेज के बारे में जानकारी दी है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को चौथे प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में वित्त मंत्री ने औद्योगिक आधारभूत ढांचों का अपग्रेडेशन, कोयला, खनिज, रक्षा उत्पादन, एयरस्पेस मैनजमेंट, एयरपोर्ट्स, मेंटनेंस, रिपेयर-ओवरहॉल, वही प्रदेशों में बिजली वितरण कंपनियां, अंतरिक्ष क्षेत्र और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सुधारों का ऐलान किया।

पांचवें चरण में राहत पैकेज के बारे में जानकारी देते हुए वित्त मंत्री द्वारा किये गए चौथे प्रेस कॉन्‍फ्रेंस की बात करें तो, ये साफ़ होता नज़र आ रहा है कि कई प्रमुख लाभार्थियों में टाटा पावर, जेएसडब्ल्यू स्टील, GVK, हिंडाल्को और जीएमआर जैसी कई बड़ी कंपनियों के अलावा अडानी, अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप, वेदांता और कल्याणी जैसे कारोबारी समूह होंगे।

आजतक की खबर के अनुसार, अडानी ग्रुप को कोयला, खनिज, रक्षा, बिजली वितरण और हवाई अड्डों जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा. जबकि वेदांता और आदित्य बिड़ला ग्रुप के हिंडाल्को कोयला और खनिज खनन परियोजनाओं को भुनाने में सक्षम होगा।

दरसअल वित्त मंत्री ने अपने ऐलान में आठ क्षेत्रों- कोयला, खनिज, डिफेंस प्रोडक्शन, हवाई क्षेत्र प्रबंधन, हवाई अड्डों, केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण कंपनियों, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में रणनीतिक सुधारों की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड की खदाने भी प्राइवेट सेक्टर को दी जाएंगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा खनन हो सके और देश के उद्योगों को बल मिले. 50 ऐसे नए ब्लॉक नीलामी के लिए उपलब्ध होंगे।

एफडीआई को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत किया गया

इसके साथ ही रक्षा उत्पादन में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को सरकार ने बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दिया गया है. पहले यह 49 प्रतिशत ही होता था। वहीं बीते दिनों कई भारतीय कंपनियों ने विदेशी रक्षा निर्माताओं के साथ कई संयुक्त उपक्रमों का गठन किया था, लेकिन अधिकांश बड़ी परियोजनायें असफल रहीं, क्योंकि विदेशी भागीदार इन परियोजनाओं में अपनी बौद्धिक पूंजी की वजह से अधिक हिस्सेदारी चाहते थे।

बता दें कि पिछले दिनों अडानी और अनिल अंबानी समूह की कंपनियों ने भारत में प्रोडक्शन के लिए विदेशी कंपनियों के साथ समझौता किया था। जबकि भारत में ही पुणे स्थित कल्याणी समूह के पास बड़ा रक्षा प्रोडक्ट का कारोबार है।

इस दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेशों में विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बिजली कंपनियों का निजीकरण होगा। साथ ही उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए प्रीपेड बिजली के मीटर लगाए जाएंगे। खास बात ये है कि अडानी और टाटा पावर इस सेक्टर के बड़े खिलाड़ी हैं।

गौरतलब है कि अडानी ने 2017 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के मुंबई वितरण कारोबार को खरीदकर बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा ली है. वहीं बीते हफ्ते, अंबानी समूह ने अपने दिल्ली बिजली वितरण कारोबार को भी बिक्री का ऐलान किया है।

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