बाबरी मस्जिद और रामजन्मभूमि फैसले के बाद, मुस्लिमों ने नहीं निकाला ‘बारावफात का जुलूस’

देश के बहुचर्चित अयोध्या के रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवा’द पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दे दिया है. ये फैसला शनीवार 9-11-2019 को आया था, और इस फैसले के आने से पहले ही देशभर के राज्यों में धारा 144 लागू कर दी गयी थी. इसके अगले दिन यानि कि रवीवार को 10-11-2019 के दिन पैगम्बर हज़रत मोहम्मद साहब की यौमे पैदाइश के का दिन था और इस दिन देशभर समेत पूरी दुनिया में इस दिन को ‘जश्ने ईद मिलादुन्नबी’ के रूप में मनाया जाता है.

अयोध्या फैसले के अगले दिन परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए अयोध्या शहर के मुस्लिम समाज ने मस्जिद में शहर के सम्मानीय मुस्लिम समाज के लोगों के साथ बैठक की. यह बैठक शनिवार की देर रात तक ‘टाट शाह’ नामक मस्जिद में चली, और वक्त की नजाकत को देखते हुए शहर के समझदार लोगों ने सर्वसम्मति से अगली सुबह 12 वफात का जुलूस नहीं निकालने का फैसला लिया.

इतिहास में पहली बार नहीं निकाला गया जश्ने ईद मिलादुन्नबी का जुलूस

इस जुलूस में लोगों और युवाओं की भारी भरकम भीड़ के साथ किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति ना बने, जिससे के शहर के शांत माहौल में खटास पहुंचे, इसके लिए पैग़ंबरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद साहब के जन्मदिन पर आयोजित होने वाला यह ऐतिहासिक जुलूस तारीख ए इस्लाम में पहली बार नहीं निकाले जाने का फैसला लिया गया.

किया क्योंकि जब जुलूस निकलेगा तो उसमें हजारों लोगों की भीड़ होगी और लगभग 4 से लेकर 6 घंटे तक हजारों लोगों की भीड़ शहर के विभिन्न स्थानों से गुजरती है. इस दौरान शहर भर में खाने-पीने के सामानों के लंगर भी लगाए जाते हैं.

एहतियात के तौर पर शहर के समझदार लोगों ने मस्जिद के इमाम साथ मिलकर सर्वसम्मति से ये फैसला लिया, कि इस बार जुलूस निकालने की जगह सभी मुस्लिम भाई लोगों के द्वारा मस्जिद में ही जश्ने ईद मिलादुन्नबी के जलसे की रस्म अदा की जाएगी.

प्रशासन ने जुलूस निकालने को लेकर प्रेरित भी किया लेकिन…

लाइव हिंदुस्तान डॉट कॉम न्यूज़ वेबसाइट के मुताबिक जुलूस को निकलवाने के लिए प्रशासन लगातार अंजुमन इस्लाम कमेटी के पदाधिकारियों से संपर्क करता रहा, और उन्होंने बाराफात का जुलूस निकालने के लिए उन्हें प्रेरित भी किया. लेकिन अंजुमन इस्लाम के पदाधिकारियों ने जुलूस निकालने को लेकर मना कर दिया.

हालांकि रविवार को शहर में अधिकतर मुस्लि’म लोगों की दुकानें बंद रही. चौक सब्जी मंडी में भी मुस्लि’मों ने अपनी दुकानें नहीं लगाई. प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के द्वारा बार-बार उनसे जुलूस निकालने का आग्रह किया, लेकिन वह लोग शहर के हालातों का हवाला देते हुए बिल्कुल राजी नहीं हुए.

हालांकि देशभर में कई जगह जुलूस निकाले गए, और बड़ी खुशी से हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश का दिन मनाया गया. लेकिन कई जगह इस्लाम की तारीख में पहली बार ऐसा हुआ कि बारावफात का जुलूस कई जगह नहीं निकल पाया. हालांकि देर शाम रात भर मस्जिदों में इबादत है चलती रही और उन्होंने इस तरह से हज़रत साहब की पैदाइश का दिन मनाया.