अगर किसी मुसलमान की वफात इस दिन हो जाए तो अल्लाह सुबहानहु उसे क़ब्र के फितने से महफूज़ रखता है…

अगर किसी मुसलमान मर्द या ओरत की इस दिन वफात हो जाती है तो इसके एवज में अल्लाह तआला रब्बुलआलमीन उसको कब्र के अज़ाब से महफूज़ कर देते हैं| वेसे एक ईमान वाले को चाहिए की कब्र के अज़ाब से महफूज़ होने के लिए वो अपने दीन और ईमान पर हमेशा कायम रहे| और नमाज़ की पाबंदी जो आज हमारे मुसलमान भाई नही कर पा रहे हैं ये बहुत ही ज़रूरी है|

वो हदीस यह है

अब्दुल्लाह बिन अम्र रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सललल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया है कि जिस मुसलमान की वफात जुमे के दिन या फिर जुमे की रात को होती है, उसको अल्लाह सुबहानहु क़ब्र के फितने से महफूज़ रखता है| रसूल-अल्लाह सललाल्लाहू अलैही वसल्लम ने एक शख्स को ये दुआ करते हुए सुना|

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ أَنِّي أَشْهَدُ أَنَّكَ أَنْتَ اللَّهُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ الأَحَدُ الصَّمَدُ الَّذِي لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ وَلَمْ يَكُنْ لَهُ كُفُوًا أَحَدٌ

अल्लहुम्मा इन्नी असअलूका अन्नी अशहदु अन्नका अन्तलल्लाहु ला इलाहा इल्ला अन्त अल अहदुस-समद अल-लज़ी लम यलिद वा लम युलद वा लम यकुल्लाहू कुफ़ुवन अहद| आप हुज़ूर (स.अ.व.) उस शख्श की ये आयात सुनकर रहा नहीं गया और वे उससे कहने लगे|

सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया ऐ अल्लाह के नेक बन्दे तूने अल्लाह को ऐसे नाम से पुकारा है, की जब कोई इस नाम से उस खुदा से कुछ भी माँगता है तो वो इस दुआ को हरगिज़ खाली नहीं जाने देता| जब इसके ज़रिए दुआ की जाती है तो क़ुबूल की जाती है| दोस्तों ये सभी भाइयों को शेयर करना मत भूलना|

तर्जुमा: या अल्लाह , मैं तुझसे माँगता हू, मैं गवाही देता हूँ की तू ही अल्लाह है, तेरे सिवा कोई माबूद नही, अल-अहद एक है, स-समद बेनीयाज़ है, तू वो है जिसकी कोई औलाद नही और तू ना किसी की औलाद है, और तू वो है जिसके बराबर कोई नही है| सुनन अबू दाऊद, जिल्द 1, 1480-सही

اللہ صلی اللہ علیہ وسلم نے ایک شخص کو کہتے سنا :

*«اللهم إني أسألك أني أشهد أنك أنت الله لا إله إلا أنت ، الأحد ، الصمد ، الذي لم يلد ولم يولد ولم يكن له كفوا أحد»*

” اے اللہ ! میں تجھ سے مانگتا ہوں اس وسیلے سے کہ : میں گواہی دیتا ہوں کہ تو ہی اللہ ہے ، تیرے سوا کوئی اور معبود نہیں ، تو تنہا اور ایسا بے نیاز ہے جس نے نہ تو جنا ہے اور نہ ہی وہ جنا گیا ہے اور نہ اس کا کوئی ہمسر ہے “ یہ سن کر آپ صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا : ” تو نے اللہ سے اس کا وہ نام لے کر مانگا ہے کہ جب اس سے کوئی یہ نام لے کر مانگتا ہے تو عطا کرتا ہے اور جب کوئی دعا کرتا ہے تو قبول فرماتا ہے
سنن ابو داوود جلد ١ ، ١٤٨٠ صحیح

Allahumma inni asaluka Anni Ashhadu annaka antallahu la ilaha illa ant, Al Ahadus-Samad , Al-ladhi lam yalid wa lam yulad, wa lam yakullahu kufuwan Ahad.

Aap Sallallahu Alaihi Wasallam ne farmaya tune Allah ko aise naam se pukara hai ki jab koi is naam se us (Allah) se maangta hai to (Wo Allah) deta hai aur jab iske zariye dua ki jati hai to Qubul ki jati hai.

Tarjuma: YA ALLAH , main tujhse maangta hu, Main gawahi deta hu ki tu hi ALLAH hai , tere siwa koi mabud nahi, Al-Ahad Ek hai , As-Samad Beniyaz hai, tu Wo hai jiski koi Aulad nahi aur tu na kisi ki aulad hai,aur tu wo hai jiske barabar koi nahi hai. Sunan Abu Dawud, Jild 1, 1480-Sahih