अजीम प्रेमजी ने ठुकरा दिया था जिन्ना का ये ऑफर, जिसके बाद तेल बेचने वाली Wipro को बनाया…

देश की सबसे बड़ी आईटी फर्म्‍स में से एक Wipro Technologies के चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी है. प्रेमजी 73 साल की उम्र में Wipro को अलविदा कहेंगे तो कुकिंग ऑयल बनाने वाली एक कंपनी को देश की टॉप आईटी कंपनी के रूप में खड़ा करने तक का सफ़र उनके जेहन में जरुर होगा. अजीम प्रेमजी के बाद उनके बेटे रिशद प्रेमजी विप्रो के अलगे चेयरमैन बनेंगे.

अजीम प्रेमजी ने पढ़ाई बीच में छोड़कर कारोबार संभाला. आम तौर पर जिस उम्र में बच्चे यह तय करते है कि भविष्‍य किस क्षेत्र में बनाना है तब अजीम प्रेमजी यह देख रहे थे कि किस सेक्‍टर में कारोबार के लिए उतरना चाहिए.

Image Source: Google

एक सामान्‍य कंपनी के मालिक के रूप में शुरू हुए सफ़र को 21.5 अरब डॉलर की संपत्ति तक पहुंचाने वाले प्रेमजी का 53 साल यह सफर स्‍टार्ट-अप कल्‍चर वाले युवाओं के लिए प्रेरणा है. Planning for Pakistan: The Planning Committee of the All India Muslim League 1943-46 नाम की किताब में प्रेमजी के पिता के बारे में बताया गया हैं.

इतिहासकार इयान टैलबोट लिखते हैं कि पाकिस्‍तान में जिस समय नई सरकार का गठन किया गया तो मोहम्‍मद अली जिन्‍ना ने अजीम प्रेमजी के पिता हाशिम प्रेमजी को अपना वित्‍त मंत्री बनाने की पेशकश की थी. लेकिन प्रेमजी ने जिन्‍ना का ऑफर ठुकरा दिया और भारत में ही रहकर अपने व्‍यापार को बढ़ाने का फैसला किया.

मोहम्‍मद हाशिम प्रेमजी ने 1945 में महाराष्‍ट्र के जलगांव में वेस्‍टर्न इंडिया वेजिटेबल प्रोडक्‍ट्स लिमिटेड की नींव डाली थी. शुरुआत में यह कंपनी सनफ्लावर वनस्‍पति के नाम से खाद्य तेल बनाती थी. ब्रिटिश राज से आजाद भारत के दूसरे दशक में तक कारोबार ठीक-ठाक चल रहा था.

Image Source: Google

1966 में हाशिम प्रेमजी अचानक गुजर गये जिसके चलते पूरे कारोबार का भार संभालने उनके बेटे अजीम प्रेमजी को बुलाया गया. इस दौरान प्रेमजी अमेरिका की स्‍टैनफर्ड यूनिवर्सिटी में इलेक्‍ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे. सिर्फ 21 साल के प्रेमजी ने पिता के बिजनेस की जिम्‍मेदारी अपने कंधों पर ले ली.

पहली जनरल मीटिंग हुई तो एक शेयरहोल्‍डर ने अजीम प्रेमजी की काबिलियत पर सवाल खड़े करते हुए उन्हें सलाह दी कि अपना हिस्‍सा किसी अनुभवी मैनेजमेंट को बेच दें. अजीम प्रेमजी को शायद यह बात बुरी लग गई और वह Wipro को सफल बनाने की कोशिश में जुट गए.

उस दौरान Wipro कुकिंग ऑयल के अलावा, साबुन, बेकरी फैट्स, हेयर केयर उत्‍पाद, हॉइड्रॉलिक सिलेंडर्स और टॉयलेट से जुड़े सामान बनाती थी और कंपनी 7 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार करती थी. अजीम प्रेमजी ने तय किया कि वह सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में उतरेंगे. उन्होंने 1977 में कंपनी का नाम बदलकर Wipro Products Limited किया.

1980 में कंपनी ने IT क्षेत्र में प्रवेश किया. प्रेमजी ने पाया कि IBM के भारत से जाने के बाद इस क्षेत्र में अपार संभावनाए हैं उन्होंने इन्हीं संभावनाओं को बुना और 90 के दशक तक Wipro ने IT सेक्‍टर में अपनी पहचान बनाना शुरू कर दी. 994-95 में Wipro की पांच यूनिट्स को ISO 9001 सर्टिफिकेशन मिला गया और आज कंपनी भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी में शुमार हैं.