अखिलेश ने बढ़ाया मदद का हाथ, ट्रॉली बैग पर सोने वाले गरीब बच्चे को लेकर किया बड़ा ऐलान, कहा- सत्ता का दिया दुख भोग रही है जनता

अखिलेश ने बढ़ाया मदद का हाथ, ट्रॉली बैग पर सोने वाले गरीब बच्चे को लेकर किया बड़ा ऐलान, कहा- सत्ता का दिया दुख भोग रही है जनता

कोरोना महामारी से जूझ रहे देश में संकट दिनों दिन गहराता जा रहा है. देश भर में लंबे समय से चल रही तालाबंदी ने रोजगार के सारे रास्ते बंद कर दिए ऐसे में अपने घरों से हजारों मीटर दूर रोजगार की तलाश में आने वाले मजदूरों की स्थिति और भी ज्यादा ख़राब होती जा रही हैं. ऐसे में प्रवासी मजदूर अपने गांवों का रुख कर रहे हैं. लॉकडाउन के चलते बस और ट्रेन समेत आगमन के सभी साधन बंद है जिससे उन्हें और भी ज्यादा तकलीफें उठानी पड़ रही हैं.

मजदूरों के इस पलायन को आज़ादी के समय हुए महापलायन से भी बड़ा मना जा रहा है. इस दौरान कई मजदूर सैकड़ों किलोमीटर का सफर पैदल चलने को मजबूर हैं. सोशल मीडिया पर आए दिन पैदल अपने घरों को जा रहे मजदूरों की संकड़ों तस्वीरें सामने आ रही है जो कभी हार्टब्रेकिंग हैं.

ऐसी ही एक तस्वीर और वीडियो हाल ही में सामने आया था जिसमें एक बच्चा सूटकेस पर लेटा हुआ है और बच्चे की माँ सूटकेस को रस्सी से खींचती नजर आ रही हैं. यह तस्वीर काफी वायरल हो रही है जो सरकार की नाकामी भरी सभी योजनाओं की पोल खोल रही हैं.

इस मासूम बच्चे को देख कर केंद्र की सरकार का तो दिल नहीं पसीजा लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मदद के लिए हाथ बढाया है. यादव ने बच्चे के भविष्य को देखते हुए उनके माता-पिता को एक लाख की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया हैं.

अखिलेश यादव ने ट्विटर पर एक ट्विट किया जिसमें उन्होंने बच्चे की मां के साथ वाला वह वीडियो पोस्ट किया और लिखा कि जिस मासूम को इतनी सी उम्र में ही इतनी भयावह स्थितियों से गुजरना पड़ा रहा है, उसके जीवन में कुछ सकारात्मक घट सके इसी आशा के साथ हम इस बच्चे के माता-पिता को 1 लाख रु की आर्थिक सहायता मुहैया कराएगें.

उन्होंने इन हालातों के लिए केंद्र सरकार और सूबे की योगी सरकार को जिम्मेदार बताते हुए लिखा कि जो जनता सत्ता का दिया दुख झेल रही है, वो जानती है कि ये बचपन का खेल नहीं है. बता दें कि इससे पहले अखिलेश ने दरभंगा की 15 वर्षीय लड़की ज्योति को भी एक लाख की सहायता देने की घोषणा की थी.

आपको बता दें कि ज्योति वही लड़की हैं जो हरियाणा के गुरुग्राम से अपने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बिठा कर अपने घर बिहार के दरभंगा तक पहुंची थी. ज्योति की इस हिम्मत की सराहना पुरे देश में की जा रही है.

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