अली की माँ ने बकरियां बेचकर बेटे को बनाया जज- पिता कपड़े सिलकर चलाते थे घर, देखिए

लखीमपुर: कहते हैं कि खुदी को कर बुलंद इतना कि खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है जी हाँ यह लाइन आज लखीमपुर खीरी जिले के बेहद गरीब परिवार में जन्मे असगर अली पर सटीक बैठती है असगर अली के परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं है उनकी मां बकरे बेचकर उनकी पढ़ाई की फीस दिया करती थीं वहीं असगर अली के जज बनने पर उनके परिजन बहुत खुश हैं।

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने पीसीएस जे 2018 परीक्षा के परिणाम जारी कर दिये हैं, जिसमें 610 छात्र छात्राओं का चयन हुआ है इनमें एक नाम है असगर अली का जिसने बेहद गरीबी में अपनी मेहनत और लग्न से पुरे प्रदेश का नाम रौशन कर दिया है। लखीमपुर जिले के मूसेपुर गांव निवासी असगर अली इस सफलता से उनका पूरा खानदान काफी खुश हैं।

Image Source: Google

यूपी के लखीमपुर खीरी जिले के बेहद गरीब परिवार में जन्में असगर अली पीसीएसजे में कामयाब होकर पूरे देश के छात्रों के सामने एक मिसाल कायम कर दी है। अली के परिवार की आर्थिक हालत ज्यादा अच्छी नहीं है। अली की माँ बताती है की उन्होंने बकरे-बकरियों को बेचकर असगर की पढ़ाई की फीस भरती थीं। और आज अली की माँ की मेहनत का फल आज उनके बेटे असगर ने जज के रुप में मिला है।

27 वर्षीय असगर अली जिले के मूसेपुर गांव के रहने वाले हैं। असगर के पांच भाई और चार बहन हैं। असगर के परिवार में जमीन जायदाद के नाम पर गांव में बस दो कमरों का छोटा सा मकान और कुछ बकरियां हैं। अब्बू शाकिर अली टेलरिंग के अच्छे कारीगर थे। परिवार चलाने के लिए वह दो बेटों के साथ राजस्थान चले गए और वहां टेलरिंग का काम करने लगे।

Image Source: Google

असगर की फीस अदा करने और घर गृहस्थी चलाने के लिए मां मैसरजहां ने कशीदाकारी शुरू कर दी। मां चिकेन की कशीदाकारी से कुछ रुपये इकट्ठा कर बेटे की फीस अदा कर देती थी। जब एडमिशन या कोई बड़ा खर्चा आ जाता था तो घर में पली बकरि या बकरो को बेचकर फीस अदा करती थीं।

आपको बता दें असगर ने हाई स्कूल पूर्व विधायक कौशल किशोर के स्कूल सेठ सधारी लाल से पास हुए। बीए करने बीएचयू चले गए। वहीं से एलएलबी, एलएलएम पास किया। असगर ने जेआरएफ भी पास किया। वर्तमान में असगर बीएचयू में ही पीएचडी कर रहे हैं। असगर की इस सफलता के बाद मां मैसरजहां को मुबारकबाद देने वालों का तांता लगा हुआ है।

Leave a comment