अल्लाह सुबहानहु ने कब्र के पास एक फ़रिश्ता मुक़र्रर किया, जब कोई उम्मती मुझ पर दुरुद भेजता

अल्लाह सुबहानहु ने कब्र के पास एक फ़रिश्ता मुक़र्रर किया, जब कोई उम्मती मुझ पर दुरुद भेजता

वेसे तो हर मोमीन को ये कहने की ज़रुरत नाह है के आप विरद किया करो| लेकिन जब हम इबादत करते हैं तो कुछ ख़ास बातें ऐसी होती हैं जिससे इबादत करने का सबाब कई गुना ज्यादा मिलता है| और जिस तरीके से इबादत की जाय और दुआ मांगी जाय वो यकीनन क़ुबूल ही हो| अल्लाह के कलाम में वो ताक़त है जिसका लफ़्ज़ों में बयान करना नामुमकिन सा है| ध्यान रहे दुआओं और आयातों में वो ताक़त होती है जिससे इंसान की ज़िंदगी बदल सकती है| ये में लिख नहीं रहा हूँ अपना पर्सनल अनुभव आपके साथ शेयर कर रहा हूँ|

में एक परेशान हाल नौजवान था, जिसके दिमाग में हर वक़्त अपने करीअर की और अपने रोज़गार को लेकर सारे दिन और यहाँ तक की जब थक हार के सो ना जाता दिमाग में कुछ न कुछ उधेध्बुन चलती ही रहती थी| मेरा बचपन गाँव पर बीता बड़ा होने पर पढ़ाई के लिए शहर आया तो जो लाकों लोगों की समस्या होती है वोहे मेरी भी हुयी|

20 साल की उमर तक कोई हुनर भी न सीख पाया, कई काम किये पर किसी भी काम में ज्यादा दिनों तक दिल न लगता| नमाज़ें भी बेरुखी के साथ पढता, क्या करू आखिर ज़िंदगी से इतना हार चुका था की आत्महत्या करने तक का कई बार दिल में ख्याल आया| लेकिन सोचता अगर मुझे कुछ हुआ तो मेरे माँ बाप का क्या होगा? जो मुझसे आस लगाये बैठे थे कि एक दिन ज़रूर में कुछ न कुछ बड़ा करूंगा|

में ज्यादा पीर फकीरों के चक्कर में नहीं पड़ता था लेकिन एक दिन किसी के यहाँ जाना हुआ तो वहां कोई फ़कीर बैठे हुए थे| जिन्होंने मुझे कुछ पड़ने के लिए बताया जो में आपको नीचे बता रहा हूँ| इस बात पर आप यकीन नहीं करेंगे शायद| उनकी बात न जाने कैसे मेरे दिल में घर कर गयी में नमाज़ों का पाबंद हो चूका था और कसरत से दरूर शरीफ पड़ता| चाहे बाइक पर चल रहा होऊं या फिर बस में सफ़र कर रहा होऊं|

कई दिन तक तो रास्ते पर चलने के दौरान ही दिल ही दिल में पढता रहता| कुछ महीनों के बाद मेरा काम में अच्छी तरह से दिल लगने लगा और एक चोटी कंपनी में नौकरी मिली| दिमाग अल्लाह के करम से इतना तेज़ होता चला जा रहा था कि मनो में कोई दिमाग को तेज़ करने वाली दवा खा रहा हूँ|

तीन साल की कड़ी मेहनत और लगन ने मुझे लगातार 3 बार प्रमोशन दिलाये| और आज मैंने अपने ये पोस्ट लिखते वक़्त के टाइम अपने 5 साल पूरे किये| और में इंडिया से सऊदी अरब आ चुका हूँ| ये वेबसाइट मेरे एक दोस्त के दोस्त चलाते हैं| मैंने उनसे अपने दिल की बात रही और लोगों तक इन वेब के ज़रिये में उनकी वजह से ये बात आपतक पहुंचा रहा हूँ इंशाल्लाह गौर कीजिये ज़िन्दगी बदल जायेगी| देर नहीं हुयी है अभी भी यकीन मानिये भाई नीचे कमेंट करंगे तो मुझे खुशी होगी में आपके सवालों के जवाब ज़रूर दूंगा|

रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया मुझ पर दुरुद भेजा करो क्यूंकि मुझ पर दुरुद भेजना तुम्हारे लिए पाकीजगी का सबब है, अल्लाह सुबहानहु ने मेरी कब्र के पास एक फ़रिश्ता मुक़र्रर किया है.

जब मेरा कोई उम्मती मुझ पर दुरुद भेजता है तो वो फ़रिश्ता मुझसे कहता है की एह मुहम्मद सलअल्लाहू अलैही वसल्लम फलाह बिन फलाह ने आप पर दुरुद भेजा है. अल सिलसिला अस सहीहा 2863, 2778

رسول اللہ ‌صلی اللہ علیہ وسلم ‌نے فرمایا: مجھ پر درود بھیجو کیوں کہ تمہارا مجھ پر درود بھیجنا تمہارے لئے پاکیزگی کا سبب ہے اللہ تعالیٰ نے میری قبر کے پاس ایک فرشتہ کھڑا کر دیا ہے، جب میری امت کا کوئی شخص مجھ پر درود پڑھتا ہے تو وہ فرشتہ مجھ سے کہتا ہے :اے محمد صلی اللہ علیہ وسلم !فلاں بن فلاں نے اس وقت آپ صلی اللہ علیہ وسلم پردرود پڑھا ہے۔
السلسلہ صحیحہ ٢٩١٣

رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا : میرے اوپر درود بھیجا کرو کیونکہ تم جہاں بھی رہو گے تمہارا درود مجھے پہنچایا جائے گا ۔
سنن ابو داوود جلد ٢ حدیث ٢٧٤-صحیح

رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم نے فرمایا جب تک نبی ‌صلی اللہ علیہ وسلم ‌پر درود نہ پڑھا جائے ہر دعا روک لی جاتی ہے۔
السلسلہ صحیحہ ٢٨٦٣، ٢٧٧٨

Hadith : Mujh par durud bhejna tumhare liye pakizgi ka sabab hai. Rasool-Allah Sal-Allahu Alaihi Wasallam ne farmaya mujh par durud bheja karo kyunki mujh par durud bhejna tumhare liye pakizgi ka sabab hai.

Allah subhanahu ne meri Qabr ke paas ek farishta muqarrar kiya hai jab mera koi ummati mujh par durud bhejta hai to wo farishta mujhse kahta hai ki Eh Muhammed Sal-Allahu Alaihi Wasallam Falah bin Falah ne aap par durud bheja hai. Al Silsila As Sahiha, 2863, 2778

Rasool-Allah Sallallahu alaihi wasallam ne farmaya Mujh par Durud bhejtey rahna kyunki tumhara durud mujh tak pahucha diya jata hai chahe tum kisi bhi jagah ho. Sunan Abu Dawud, Jild 2, 274-Sahih

Rasool-Allah Sal-Allahu Alaihi Wasallam ne farmaya Jab tak Nabee Sal-Allahu Alaihi Wasallam par durud na bheja jaye har dua rok li jati hai. Al Silsila As Sahiha, 2913

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