अमरनाथ यात्रा मुसलमा’नों की भागीदारी के बिना असंभव: राज्यपाल सत्यपाल मलिक

नई दिल्ली: हिमालय पर स्थित पवित्र तीर्थ स्थल अमरनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जत्था रवाना हो चुका है. पूरा माहौल भक्तिमय है और हर तरफ बम भोले के नारे लग रहे हैं यह यात्रा धार्मिक भाईचारे के प्रतीक की तरह भी है। जहां अक्सर पालकी पर शिव के भक्त होते हैं और पालकी ले जाने वाले मुसलमा’न होता है वहीं कई बार शिवभक्त बाबा के दर तक पहुंचने के लिए खच्चर का भी सहारा लिया जाता हैं और इसे संभालने वाले कोई और नही बल्कि मुसलमा’न होते हैं।

जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा की अमरनाथ यात्रा का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने में स्थानीय मुस्लि’मों की भूमिका की प्रशंसा की और उम्मीद जतायी कि तीर्थयात्रा इस वर्ष भी सफल रहेगी मलिक ने कहा कि सरकार हर साल तीर्थयात्रा के सुरक्षा पहलू देखती है जबकि इसका आयोजन स्थानीय मुसलमा’नो के सहयोग से होता है।

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मलिक ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा की यात्रा की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है और हम उसकी देखरेख कर रहे हैं. पुलिस या सेना इस तीर्थयात्रा का संचालन नहीं करती बल्कि यहाँ के स्थानिये लोग करते है कई वर्षों से अमरनाथ यात्रा का आयोजन कश्मीर के लोगों विशेष तौर पर हमारे मुस्लि’म भाइयों द्वारा किया जा रहा है यात्रा उनके सहयोग से होती है उन्होंने कहा यदि हम सभी साथ मिलकर काम करे वह सफल होगी।

बता दें दक्षिण कश्मीर हिमालय में स्थित भगवान शिव की पवित्र गुफा के लिए 46 दिवसीय वार्षिक तीर्थयात्रा सोमवार से शुरू होगी और 15 अगस्त को समाप्त होगी यह पूछे जाने पर कि अमित शाह के केंद्रीय गृह मंत्री बनने के बाद क्या केंद्र की कश्मीर नीति में बदलाव दिखेगा मलिक ने कहा कि उन्हें अभी तक कुछ वैसा नहीं दिखा है।

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आपको बता दें पवित्र गुफा दक्षिण कश्मीर हिमालय में 3880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है गुफा 160 फुट लंबी और 100 फुट चौड़ी और काफी ऊंची है. यात्रा जम्मू-कश्मीर के अनं’त नाग जिले के 36 किलोमीटर लंबे पारंपरिक पहलगाम मार्ग और गांदेरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से होती है।

अब तक देशभर से करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु 46 दिन चलने वाली इस यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. पिछले साल 2.85 लाख तीर्थ यात्रियों ने अमरनाथ के दर्शन किए थे जबकि 2015 में तीर्थयात्रियों की संख्या 3.52 लाख, 2016 में 3.20 लाख और 2017 में 2.60 लाख लोगो ने दर्शन किए थे।

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अमरनाथ गुफा हिं’दुओं के प्रमुख तीर्थस्‍थलों में से एक है. मान्यता है कि गुफा में बर्फ का शिवलिंग है. इसलिए इसे बाबा बर्फानी भी कहते हैं इसे अमरेश्वर भी कहा जाता था. मान्यता है कि इसी गुफा में भगवान शिव ने अपनी पत्नी पार्वती को अमरत्व का मंत्र सुनाया था।

हिंदूओं के इस पवित्र यात्रा में मुस्लि’मों की भी बड़ी भागीदारी होती है, या यूं कहें कि इनके सहयोग के बिना यात्रा असंभव है. दरअसल वे यात्रा को आसान बनाने के लिए हमेशा खड़े रहते हैं. इसकी एक वजह बिजनेस भी है. जिसमें चाय पानी ड्राय फ्रूट बिस्किट जैसा व्यापार शामिल है यही नहीं पालकी पर श्रद्धालुओं को ले जाने के रोजगार में स्थानीय मुस्लिमों का वर्ग शामिल है।

एक अनुमान और स्थानीय लोगों के मुताबिक अमरनाथ यात्रा से करीब 20 हजार मुसलमा’न लाभान्वित होते हैं और उन्हें रोजगार मिलता है।

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