तबलीगी जमात मामले को लेकर फर्जी खबर फैलाते हुए पकड़ा गया ANI, नोएडा DCP की फटकार के बाद न्यूज एजेंसी पर भड़के….

नई दिल्लीः कोरोना की यह बीमारी तो आज है, कल खत्म हो जाएगी लेकिन देश में सबसे बड़ी बीमारी भारतीय मीडिया फैला रहा है. देश के अधिकांश न्यूज चैनल अफवाह फैलाने की मशीन बन चुके हैं लेकिन इनमें से भी कुछ चैनल ऐसे हैं जिन्होंने ऐसा लगता है कि देश को सांप्रदायिकता की आग में झुलसाने की सुपारी ले रखी है. ऐसा लग रहा है जैसे कोरोना वायरस भारत में चीन या किसी बहारी देश से नहीं बल्कि मुसलमान से फैला है।

देश की कई मीडिया संस्थानों के साथ साथ अब समाचार एजेंसी एएनआई भी सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गया है, लोग न्यूज एजेंसी की जमकर आलोचना कर रहे है. दरअसल, मंगलवार को एएनआई यूपी ने एक ख़बर ट्वीट किया, जिसे नोएडा पुलिस ने फर्जी करार दे दिया। नोएडा पुलिस की फटकार के बाद एएनआई यूपी ने फेक न्यूज डिलीट कर दिया।

दरअसल, एएनआई यूपी ने मंगलवार 7 अप्रैल) को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया एएनआई यूपी ने अपने ट्वीट में गौतम बुद्ध नगर के DCP डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस संकल्प शर्मा के बयान का हवाला देते हुए लिखा, कि नोएडा सेक्टर- 5, हरौला में उन लोगों को क्वारंटीन किया गया है, जो तबलीगी जमात के लोगों के कॉन्टैक्ट में आए है।

जिसके बाद एएनआई यूपी के इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए एएनआई की मालिक स्मिता प्रकाश ने कहा, नोएडा सुरक्षित रहो हालांकि, एएनआई यूपी के इस ट्वीट के बाद नोएडा पुलिस के डीसीपी रैंक के अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से समाचार एजेंसी के दावे का खंडन किया और इसे ‘फर्जी खबर’ करार दे दिया।

नोएडा DCP के ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर लिखा गया, प्रक्रिया के मुताबिक, उन लोगों को क्वारंटीन किया गया है, जो कोरोना पॉजिटिव मामलों के संपर्क में आए हैं। तबलीगी जमात का कोई जिक्र नहीं है। आप मिसकोट कर रहे हैं और फेक न्यूज़ फैला रहे हैं।

वही नोएडा डीसीपी के इस ट्वीट को पुलिस कमिश्नरेट नोएडा के ट्विटर हैंडल से भी रिट्वीट किया गया। डीसीपी नोएडा के इस ट्वीट के बाद न्यूज एजेंसी सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गया। कई लोगों ने फर्जी खबरें फैलाने के लिए न्यूज एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

आपको बता दें कि, इससे पहले ज़ी मीडिया के साथ साथ कई मीडिया भी तबलीगी जमातियों के बारे में फर्जी खबर फैलाता हुआ पकड़ा गया था। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद पुलिस की प्रतिक्रिया के बाद ज़ी मीडिया ने अपने फर्जी ख़बर को अपने ट्विटर अकाउंट से डिलीट कर दिया था।