CAA-NRC के बाद मोदी सरकार की एक और बड़ी तैयारी, अगले हफ्ते लग सकती है कैबिनेट की मुहर

नई दिल्लीः नागरिकता संशोधन एक्ट (Citizenship Amendment Act) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर(National Register for Citizens) पर देश भर में मचे घ’मासा’न के बीच अब केंद्र की मोदी सरकार एक और कानून ध’रात’ल पर उतारने में जुटी है। आपको बता दें अगले हफ्ते होने वाली कैबिनेट की बैठक में एनपीआर के न’वीनीक’रण को हरी झंडी मिलने की संभावना है। हलाकि पश्चिम बंगाल और केरल सरकार ने एनपीआर का भी विरोध किया है। बता दें यह एनआरसी से पूरी तरह अलग है।

केंद्र सर्कार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register) लाने की तैयारी कर रही है। अभी हाल ही में कुछ दिनों पहले ही भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (Census Commissioner) विवेक जोशी ने इस बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि असम को छो’ड़कर देश के सभी हिस्सों में एनपीआर पर काम शुरू किया जाएगा।

हलाकि लोगो के मन में अब सवाल यह है की राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register) एनपीआर है क्या? इसके आने से जनगणना में क्या बदल जाएगा? सरकार एनपीआर क्यों लाना चाहती है? और इससे क्या फायदा और क्या नुकसान होगा इन सभी सवालों के जवाब आगे पढ़ें।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के जरिए सरकार देश के हर नागरिक की जानकारी रख सकेगी, इसके तहत हर भारतीय नागरिक का बायोमेट्रिक रिकॉर्ड लिया जाएगा और उनकी वंशावली भी दर्ज की जाएगी, वैसे निवासी जो छह महीने या उससे ज्यादा समय से किसी क्षेत्र में रह रहा है, उसके लिए एनपीआर में पंजीकरण कराना अनिवार्य हो जाएगा।

एनपीआर को सरकार राष्ट्रीय स्तर, राज्य स्तर, जिला, उप जिला व स्थानीय स्तर पर तैयार करेगी, एनपीआर तीन चरणों में तैयार किया जाएगा – पहला चरण एक अप्रैल 2020 से लेकर 30 सितंबर 2020 के बीच होगा। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों द्वारा घर-घर जाकर जरूरी आंकड़े जुटाए जाएंगे, दूसरा चरण 9 फरवरी 2021 से 28 फरवरी 2021 तक होगा। इसके बाद तीसरा चरण होगा, जिसमें जुटाए आंकड़ों में जरूरी संशोधन किए जाएंगे।

आपको बता दें एनपीआर का पूरा नाम नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर है। देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना इसका मुख्य लक्ष्य है। इस डेटा में जनसांख्यिंकी के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी होगी।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार में 2010 में एनपीआर बनाने की पहल शुरू हुई थी। तब 2011 में जनगणना के पहले इस पर काम शुरू हुआ था। अब फिर 2021 में जनगणना होनी है। ऐसे में एनपीआर पर भी काम शुरू हो रहा है।