आप (स.अ.व.) ने ख्व़ाब देखा के एक क़ुरान हाफ़िज़ का सर पथ्थरों से कुचला जा रहा था क्योंकी…

समुरा बिन जुन्दब रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने ख्वाब बयान करते हुए फरमाया की जिसका सिर पत्थर से कुचला जा रहा था वो क़ुरान का हाफ़िज़ था मगर वो क़ुरान से गाफ़िल हो गया और फ़र्ज़ नमाज़ पढ़े बगैर सो जाया करता था. सही बुखारी, जिल्द 2, 1143

سمرہ بن جندب رضی اللہ عنہ نے بیان کیا ان سے نبی کریم صلی اللہ علیہ وسلم نے خواب بیان کرتے ہوئے فرمایا کہ جس کا سر پتھر سے کچلا جا رہا تھا وہ قرآن کا حافظ تھا مگر وہ قرآن سے غافل ہو گیا اور فرض نماز پڑھے بغیر سو جایا کرتا تھا ۔
صحیح بخاری جلد ۲ ۱۱۴۳

Samura bin Jundab Radi Allahu Anhu se rivayat hai ki Rasool-Allah Sallallahu Alaihi wasallam ne khwab bayan karte huye farmaya ki jiska sir paththar se kuchla ja raha tha wo Quran ka hafiz tha magar wo Quran se gafil ho gaya aur Farz namaz padhe bagair so jaya karta tha. Sahih Bukhari, Jild 2, 1143

Narrated Samura bin Jundab Radi Allahu Anhu The Prophet (ﷺ) said in his narration of a dream that he saw, “He whose head was being crushed with a stone was one who learnt the Qur’an but never acted on it, and slept ignoring the compulsory prayers. Sahih Bukhari, Book 21, Hadith 244

सूरए नूर की आयत क्रमांक 31

और (हे पैग़म्बर!) ईमान वाली स्त्रियों से (भी) कह दीजिए कि वे भी अपनी निगाहें नीची रखा करें, अपनी पवित्रता की रक्षा करें, अपने श्रृंगार प्रकट न करें, सिवाय उस भाग के जो उसमें से स्वयं खुला रहता है। और अपने सीनों पर अपने दुपट्टे डाले रहें और अपना श्रृंगार किसी पर प्रकट न करें.

सिवाय अपने पतियों के या अपने पिताओं के या अपने पतियों के पिताओं के या अपने बेटों के या अपने पतियों के बेटों के या अपने भाइयों के या अपने भतीजों के या अपने भांजों के या महिलाओं के या उन दासियों के जो उनके अपने स्वामित्व में हों या उन दासों के जो यौन इच्छा की अवस्था को पार कर चुके हों.

या उन बच्चों के जो स्त्रियों की गुप्त बातों से परिचित न हों। और महिलाएं (इस प्रकार) अपने पैर धरती पर मार कर न चलें कि उन्होंने अपना जो श्रृंगार छिपा रखा हो, वह प्रकट हो जाए। हे ईमान वालो! तुम सब मिल कर ईश्वर से तौबा करोकि शायद तुम्हें कल्याण प्राप्त हो जाए। (24:31)

पिछली आयत में ईश्वर ने पुरुषों को दो आदेश दिए थे, प्रथम यह कि अपनी आंखों को नियंत्रित रखें और दूसरे यह कि अपनी नैतिक पवित्रता की रक्षा करें। यह आयत भी आरंभ में उन्हीं दो ईश्वरीय आदेशों को महिलाओं के लिए बयान करती है और फिर महिलाओं को अपवित्र लोगों की दृष्टि से सुरक्षित रखने के लिए तीन बातों की ओर ध्यान केंद्रित करती है.