आ’तंकि’यों के साथ पकड़ा गया DSP देविंदर ‘सिंह’ की जगह अगर ‘खान’ होते तो BJP और RSS के लोग…

जम्मू-कश्मीर पुलिस से निलंबित डीएसपी दविंदर सिंह की गिरफ्तारी पर देश भर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. शनिवार 11 जनवरी की रात 2 आ’तंकि’यों के साथ गिरफ्तार किए गए सिंह को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है. कांग्रेस के लोकसभा में नेता अधीर रंजन चौधरी ने देविंदर के नाम को लेकर RSS पर निशाना साधा है।

दरअसल, रविवार को सुरक्षाबलों के द्वारा जम्मू-कश्मीर के कुलगाम क्षेत्र में चेकिंग के दौरान हिजबुल मुजाहिद्दीन के दो आ’तंकि’यों को साथ एक जम्मू कश्मीर पूलिस के डीएसपी देविंदर सिंह रैना को पकड़ा है। सुरक्षाबलों के द्वारा आ’तंकि’यों के साथ राज्य पुलिस के डीएसपी देविंदर सिंह रैना को गिरफ्तार किये जाने के बाद से राजनीतिक पार्टीयां एक दूसरे पर टिप्पणी करने लगी है।

डीएसपी देविंदर सिंह के आ’तंकी गतिविधियों में फं’सने के बाद से विपक्ष के द्वारा सरकार पर निशाना साधने का काम शुरू हो गया है। कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने एख ट्वीट के माध्यम से कहा कि अगर क्या होता डीएसपी देविंदर सिंह देविंदर खान होता तो आरएसएस के ट्रोल रेजीमेंट की प्रतिक्रिया और ज्यादा स्पष्ट होती। उन्होंने कहा कि हमारे देश के दुश्मनों को रंग,पंथ और धर्म को बिना देखे उसकी निंदा कि जानी चाहिए।

अधीर रंजन चौधरी ने आगे कहा कि भाजपा ओर आरएसएस देश की सां’प्रदा’यिक स’द्भाव को बिगाड़ने की कोशिश कर रही है। चौधरी ने देविंदर सिंह के गिरफ्तारी के बाद पुलवामा ह’मले का जिक्र करते हुए कहा कि अब सवाल उठेंगे कि पुलवामा में पिछले साल हुए ह’मले के पीछे साजिशकर्ता कौन थे। अब इस ह’मले की फिर से जांच होनी चाहिए।

इसके अलावा कांग्रेस के हीं प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने डीएसपी की हुई गिरफ्तारी के बाद अपने एक ट्वीट के माध्यम से सवाल किया है कि देविंदर सिंह कौन हैं? 2001 में हुए पर संसद ह’मले में उसकी क्या भूमिका है? साथ हीं पुलवामा में हुए ‘हमले में उसकी क्या भूमिका है? उन्होने आगे कहा कि क्या डीएसपी देविंदर सिंह हिजबुल के आ’तंकि’यों को अपने मन से लेकर जा रहा था य़ा वो सिर्फ एक मोहरा है।

वही बीजेपी ने इस बयान के जवाब अपने आधिकारीक ट्वीटर अकाउंट से अपने प्रवक्ता संबित पात्रा का शायराना अंदाज में एक ट्वीट किया है। जिसमे लिखा है कि रोज सहलाते हैं पीठ को, खं’जर भों’कते हैं। हिंदुस्तान की पीठ पर फिर कहते हैं हमें दे’शद्रो’ही न कहो। तुम पर छोड़ते हैं हम बताओ इनको क्या कहें?