मुजफ्फरनगर केस में मुस्लि’मों पर हम’ले के सभी आरोपी बरी, क्या गैं’गरे’प, ह$त्या और दं’गे हुए ही नहीं ?

नई दिल्ली: आज़ाद भारत के 70 सालो मे दं’गों का इतिहास बहुत लंबा है जिसमे बहुसंख्यक समूदाय कानून को ठेंगा दिखाकर अल्पसंख्यक समूदाय पर धर्म की रक्षा के नाम हम’ले किये और बीच सड़कों पर दु’ष्क’र्म और ह$त्या जैसे जघंन्न’य अपरा’ध किये जिसे हमारे देश मे दं’ग कहा और लिखा जाता है वो असल मे एक समूदाय का दूसरे समूदाय पर हम’ला है लेकिन इस सच्चाई को आज तक देश के किसी भी बड़े मीडिया हाउस या सरकार ने नहीं उठाया और न ही इसकी निष्पक्ष जाँच हुई। और नतीजा ये निकला की 65 बेकसूर मुस्लमा’नों की ह@त्या और दर्जनों गैं$ग रे’प के आरो’पी बाइज्जत बरी हो गए।

जी हाँ उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में साल 2013 में हुए दं’गों के मामले में अदालत ने सभी आरोपि’यों को बरी कर दिया है। अदालत ने जिन लोगों को बरी किया है, उनपर दं’गों के दौरान मुसलमा’नों की ह@त्या और महिलाओ से दु’ष्क’र्म करने का आरोप था। इन सभी आरोपियों पर दं’गों के सिलसिले में बीते दो साल से 10 मुकदमे चल रहे थे।

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इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि मुजफ्फरनगर दं’गों में पुलिस ने अहम गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि ह@त्या में इस्तेमाल ह’थिया’रों को पुलिस ने कोर्ट में पेश नहीं किया। आपको बता दें कि मुजफ्फरनगर में साल 2013 में हुए दं’गे में कम से कम 65 लोग मा’रे गए थे।

मुजफ्फरनगर दं’गो मा’रे गए लोगो के ज़्यादातर परिजनों और करीबियों ने अदालत में मुकदमे दर्ज कराए थे। लेकिन बाद में यह गवाह अपने बयान से पलट गए जिसमे पुलिस अधिकारी भी शामिल थे और बाद में अदालत ने इन सभी 10 मुकदमों के आरोपियों को बरी कर दिया। क्योकि पांच गवाह अदालत में इस बात से मुकर गए कि इस घटना के वक्त वो मौके पर मौजूद नहीं थे। और छह अन्य गवाहों ने अदालत में कहा कि पुलिस ने जबरन खाली कागजों पर उनके हस्ताक्षर लिए थे।

ग़ौरतलब है कि इस दं’गे से जुड़े सभी मामले पूर्व अखिलेश यादव सरकार में दर्ज किए गए थे। इनकी जांच भी पिछली सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई। हालांकि इनकी सुनवाई वर्तमान योगी सरकार के कार्यकाल में चल रही थी। जिसमें सभी को बरी किया गया है।