पिछले 4 महीनों में देश में 3.5 लाख नौकरियां खत्म, Maruti का बंटाधा’र, Tata का प्लांट भी बंद हुआ

पिछले काफी महीनों से देश में औद्योगिक क्षेत्र की बुरी हालत है, और देश की अर्थव्यवस्था में भी लगातार गिरावट आने के चलते अभी पिछले कुछ दिनों पहले ही इसी महीने में 30 बड़ी स्टील कंपनियों में ताला लग चुका था. इसके बाद जनसत्ता की एक न्यूज के मुताबिक मारुति ने अपना उत्पादन घटा दिया है. वहीं टाटा मोटर्स के भी दो बड़े प्लांट बंद हो चुके हैं.

रायटर्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार देशभर में इस वक्त पिछले 4 महीने का आंक’ड़ा उठा कर देखे तो तकरीबन साढे तीन लाख से भी ज्यादा कर्मचारियों को उनकी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है. ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए यह बहुत बुरी खब’र है.

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इस तरह से सरकार के लिए भी यह एक चुनौती के रूप में खड़ी होती जा रही है. बाइक निर्माता कंपनियां भी देशभर से लगभग एक लाख कर्मचारियों को बाहर कर चुकी हैं. और अब हाल ही में खबर है कि ऑटोमोबाइल सेक्टर की पांच बड़ी दिग्गज कंपनियां भी उत्पादन कम होने की वजह से अपने कर्मचारियों की छटनी करने जा रही है.

ऑटोमोबाइल सेक्टर इस सदी के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है और हिंदुस्तान में बेरोजगार लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. क्योंकि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने भी व्यापार में सुस्ती के चलते अपने उत्पादन में लगभग 25% की कटौती कर दी है.

मारूती कम्पनी के लिए यह लगातार छठवां महीना है, जब उन्होंने लगातार अपना उत्पादन कम किया है टाटा मोटर्स की भी हजारों कारें बिकने के लिए धूल खा रही हैं क्योंकि आर्थिक मंदी के चलते ऐसी स्थिति में लोगों के लिए चार पहिया वाहन खरीदना मुश्किल हुआ जा रहा है.

वहीं जीएसटी के कारण कंपनियां लगातार गड्ढे में गिरती जा रही हैं वाहन निर्माताओं ने एक बैठक के बाद इस के हाला’त से निपटने के लिए कुछ आवश्यक सुधार करने की मांग कही है जिसमें से जीएसटी दर घटाने को लेकर भी एक मांग है.

उन्होंने इस बैठक में कहा है कि अगर जीएसटी को 28% से घटाकर 18% कर दिया जाए तब कुछ राहत मिलने के की उम्मीद हो सकती है. आपको बता दें कि अगर इस तरह से यह मंदी चलती रही तो आने वाले समय में भी हालात और भी बुरे हो सकते हैं.

आने वाले समय में तकरीबन 3:30 करोड़ लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ सकता है फिलहाल देश में माहौल इस वक्त कुछ और ही चल रहा है ऐसे में सरकार देखते हैं कि सरकार औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर में फादर कों के लिए बड़े उत्पादकों के लिए कोई राहत भरी खबर लेकर आती है या नहीं.