अयोध्या विवादः सुप्रीम कोर्ट अपनी निगरानी में मध्यस्थता के जरिए चाहता है समझौता

देश में जब भी कोई चुनाव होते है तो राजनीतिक पार्टियां कुछ बड़े मुद्दों को हवा देना शुरू कर देती है. कुछ बड़े और विवादित मुद्दों को बार बार उठा कर कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का काम करते है. जल्द ही लोकसभा चुनाव होने वाले है ऐसे में एक बार से देश के सबसे बड़े विवादित मुद्दा रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद का जिन्न एक बार फिर से जग गया है. अयोध्या विवाद को लेकर काफी समय से मामला सुप्रीम कोर्ट में अटका हुए है. इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है.

मंगलवार को कोर्ट ने इस मामले में मध्यस्थता की वकालत की. कोर्ट चाहता है कि इस मामले पर दोनों पक्ष आपसी बातचीत से मामले को सुलझा ले. सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद में मध्यस्थता के ज़रिए समझौता करने की बात कही.

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मंगलवार को इस मामले पर हुए सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों से मध्यस्थता के ज़रिए मामले में समझौते की संभावना तलाशने के लिया कहा. चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा कि अगर विवाद सुलझाने की एक फ़ीसदी भी संभावना है तो सभी पक्षों को मध्यस्थता के लिए जाना चाहिए.

इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 5 मार्च का दिन तय किया. सुप्रीम कोर्ट इस सुनवाई में तय करेगा कि इस मामले को नियुक्त मध्यस्थ के पास जाना चाहिए या नहीं. इसके साथ ही कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पेश किये गए दस्तावेज़ पर मुस्लिम और हिंदू दोनों पक्षों ने ही सवाल उठाए हैं.

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जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को दस्तावेज़ों के अनुवाद को परखने के लिए आठ हफ़्तों का समय दिया है. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि इस दौरान दोनों पक्षों को मध्यस्थता की संभावना तलाशनी चाहिए. आपको बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाना चाहती है.

दरअसल भारतीय जनता पार्टी ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान राम मंदिर के निर्माण का वादा किया था और इसी के दम पर बीजेपी सत्ता में काबिज हुई थी इसके बाद समय समय में कई बार बीजेपी के कई बड़े नेता भी मंदिर निर्माण की बात करते रहे लेकिन अभी तक इस मामले में बीजेपी को कोई सफलता हासिल नहीं हुई है. इसी के चलते बीजेपी के कट्टर समर्थक उससे कफा हैं.