मस्जिद ए नबवी का वो दरवाजा जहां से जिब्राईल वही लेकर आते थे

Masjid-E-Nabvi: दुनिया की दूसरी सबसे मस्जिद जो मुस्लि’म समुदाय के लोगों के लिए सबसे पवित्र स्थल के रूप में मानी जाती है और यह सऊदी अरब के मदीना शहर में स्थित है| इससे पहले एक और मस्जिद है जिसको मुसलमा’नो के नज़दीक प्रथम स्थान प्राप्त है वो है मस्जिद-अल-हराम जहां पर पवित्र काबा स्थित है और मुसलमा’नो का हज अदा होता है| बता दें कि यह मस्जिद दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद है जो सऊदी अरब के मक्का शहर में स्थित है| दोनों ही मस्जिद अपने इतिहास और पवित्रता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं|

आज हम बात करने वाले हैं मस्जिद ए नबवी की कुछ ऐतिहासिक चीजों और जगहों के बारे जो आपके ईमान को ताज़ा कर देगी| हम बात कर रहे हैं मस्जिद ए नबवी के पूर्वी दरवाज़े के बारे में जो बाब-ए-जिब्राईल के नाम से पूरे विश्व में प्रसिद्ध है| इसे बाब-ए-जिब्राईल क्यों कहते हैं क्या कारण हैं इसकी इतनी प्रसि’द्धि का इसकी पवित्र’ता का उसके बारे में आज हम बात करेंगे|

मस्जिद-ए-नबवी के पूर्वी तरफ स्थित दरवाजे को बाब-ए-जिब्राईल कहा जाता है| इसे बाब-ए-जिब्राईल इसलिए कहा जाता है क्योंकि फरिश्ता जिब्राईल (AS) इस तरफ से वही (रहस्योद्घा’टन) के साथ उतरते थे| इसकी ऐतिहासिकता को बरकरार रखने के लिए इसे आज भी वैसा ही बनवाया गया है जैसे सुलतान अब्दुल मजीद ने तामीर करवाया थी|

मस्जिद ए नबवी का यह दरवाज़ा का यह दरवाज़ा अपनी एक बहुत बड़ी ऐतिहासिकता को दर्शाता है जिसको लेकर पैगम्बर मुहम्म्द सल्लाहु ता आला अलय्हि वसल्लम की हयात ए मुबारक का एक वाक़्या बहुत प्रसिद्ध है जो अम्मा आयेशा (RA) द्वारा बताया गया था|

इस वाकय में जिब्राईल (AS)अहजब की लड़ाई के बाद पैगंबर मुहम्मद (SA) के पास आए और बाब के दरवाजे पर पैगंबर मुहम्मद (SA) से बात की। बता दें कि यह वाक़्या कॉन्फेडेरेट्स की लड़ाई और खंदक की लड़ाई के रूप में भी जाना जाता है|

इस वाक़्या का ज़िक्र सही बुखारी में उल्लेख किया गया है जिसमे आयशा (RA) ने बताया कि अहज़ाब की लड़ाई के बाद, पैगंबर मुहम्मद (SA) ने खुद को निहथ्थे कर लिया और गुस्ल किया इस बीच, जिब्राईल (AS) आए और बाब-ए-जिब्राईल के दरवाजे के पास पैगंबर मुहम्मद (SA) से बात की।

जिब्राइल (AS) ने पैगंबर मुहम्मद (SA) से कहा कि आपने अपनी आर्मस दूर कर ली हैं लेकिन हम (फरिश्ते) अभी भी युद्ध की वर्दी में हैं, इसलिए आप हमारे साथ बनो कुरैज़ा की जमात पर हमला करने के लिए आइए। अम्मा आयेशा (RA) ने बताया कि मैं अपनी कुटिया के दरवाजे में एक दरार के माध्यम से जिब्राईल को देख रही थी, जिब्राइल पूरे धूल से ढके हुए थे।

जानकारी के लिए बता दें कि इस दरवाज़े को बाब-ए-उसमान यही उसमान का दरवाजा के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि पैगंबर मुहम्मद (SA) उसमान (RA) से मिलने इसी दजवाजे के माध्यम से जाया करते थे जिनका घर इस दरवाज़े के विपरीत था।

बता दें कि इस दरवाजे की मूल स्थिति मौजूदा मस्जिद ए नबवी के अंदर है। इसे मस्जिद-ए-नबवी के विस्तार के साथ पूर्व की ओर ले जाया गया है।