अयोध्या विवाद लेकर सुप्रीम कोर्ट का अब तक का सबसे बड़ा फैसला कहा- जो बाबर ने किया वो अब बदल…

देश में जब भी कोई चुनाव नजदीक आने लगते है तो देश की राजनीतिक पार्टियां कुछ बड़े मुद्दों को हवा देना शुरू कर देती है. राजनेता देश के कुछ बड़े और विवादित मुद्दों को बार बार उठा कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का काम करते है. जल्द ही लोकसभा चुनाव होने वाले है ऐसे में देश के सबसे बड़े विवादित मुद्दा रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद का जिन्न एक बार फिर से जग गया है. अयोध्या विवाद को लेकर काफी समय से मामला सुप्रीम कोर्ट में अटका हुए है. इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सामने आया हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर मध्यस्थता विवाद को लेकर अपना फैसला सुरक्षित रखा लिया है. मामले की सुनवाई के दौरान हिंदू महासभा समेत सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा. इस दौरान महासभा के वकील हरिशंकर जैन ने मध्यस्थता का विरोध किया.

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वहीं मामले की सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कहा कि मामले के पक्षों के बीच मध्यस्थता बंद कमरे में होना चाहिए ताकि यह लीक न हो. मामले पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस बोबडे ने कहा कि हम जानते हैं कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ा मसला है.

उन्होंने कहा कि लेकिन हम बेहतर भविष्य का प्रायस कर रहे है. बातचीत के माध्यम से यह मसला हल हो सकता है. उन्होंने कहा कि बाबर ने जो किया है उसको तो बदला नहीं जा सकता है. लेकिन हम मौजूदा हालातों को देख सकते हैं. उन्होंने इस मामले पर मध्यस्थता के लिए पैनल के गठन करने की बात पर जोर दिया.

वहीं जैन ने कहा कि अगर बातचीत से पार्टियां मान भी जाए तो आम जनता इस समझौते पर स्वीकार नहीं करेगी. इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा है कि आपको लगाता है कि किसी तरह का समझौता करना पड़ेगा कोई हारेगा, कोई जीतेगा लेकिन मध्यस्थता में हर बार ऐसा नहीं होता है. मध्यस्थता से जो फैसला निकलेगा उसे कोर्ट आदेश का रूप दे देगा.

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वहीं मध्यस्थता के प्रस्ताव पर मुस्लिम पक्ष ने सहमति जाहिर की. उनके वकील ने कहा कि इसके लिए सभी पक्षों की सहमति जरूरी है. हिंदू महासभा के वकील ने कहा कि इस मामले में मध्यस्थता से पहले पब्लिक नोटिस भेजा जाना जरूरी है. यह जमीन हमारी है और हम इसके लिए मध्यस्थता को तैयार नहीं हैं.

जस्टिस भूषण ने कहा है कि अगर पब्लिक नोटिस दिया गया तो मसला सालों तक खिंच जाएगा. जस्टिस बोबडे ने कहा कि यह मामला किसी राजनीतिक पार्टी का नहीं बल्कि यह मामला दो समुदाय के बीच का है. इसलिए इसे केवल जमीन से नहीं जोड़ा जा सकता है यह गलत हैं. इसी दौरान कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा.

यह पहली बार नहीं है जब अयोध्या मामले पर मध्यस्थता की कोशिशें की जा रही है. इससे पहले साल 2017 में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री श्री रविशंकर प्रसाद भी मामले पर मध्यस्थता कराने का प्रस्ताव रख चुके है. बता दें कि इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर वाली पीठ कर रही है.