ममता सरकार ने एंटी मोब लिं’चिं’ग बिल किया तैयार: सजा इतनी खत’रना’क की अपराधि’यों को…

वेस्ट बंगाल की सरकार ने देश भर में चल रही मोब लिं’चिं’ग के खिलाफ राज्य विधानसभा में एक नए एंटी लिं’चिं’ग बिल तैयार किया है जिसके तहत दोषि’यों को अधिकतम सजा के रूप में आजीवन कारावास और 5 लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा और इसी के साथ पीड़ि’तों के लिए मुफ्त कानूनी और चिकित्सीय सहायता इस बिल के तहत दी गई है| बता दें कि वेस्ट बंगाल प्रिवेंशन ऑफ लिं’चिं’ग बिल, 2019 एक स्टेट टास्क फोर्स के गठन का प्रस्ताव करता है, जिसमें स्टेट को ऑर्डिनेटर के साथ IG रैंक और नोडल ऑफिसर न हों ताकि लिं’चिं’ग की घट’नाओं को रोका जा सके।

सूत्रों के मुताबिक़ जो कानून का उद्देश्य है वे सोमवार को पेश किया जा सकता है वह उद्देश्य है कमजोर व्यक्तियों के संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी संरक्षण के लिए प्रदान करना और लिं’चिं’ग को रोकना और राज्य में लिं’चिं’ग के कृ’त्यों को दंडि’त करना है| धर्म जाति के आधार पर भी’ड़ द्वारा हिं$सा या किसी भी तरह की हिं#सा या किसी भी तरह की घट’ना को अंजाम देना है|

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बता दें कि लिं’चिं’ग करने वाले चाहे दो या दो से अधिक व्यक्तियों का समूह हो किसी भी अधिनियम या श्रृंख’ला के रूप में लिं’चिं’ग को परिभाषित करता है। से$क्स जन्म स्थान भाषा आहार व्यवहार यौ’न अभिविन्यास राजनीतिक संबद्ध’ता जातीयता या कोई अन्य आधार हो।

यह एंटी मोब लिं’चिं’ग बिल तीन श्रेणियों की सजा का प्रस्ताव करता है अधिकतम तीन साल की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना यदि अधिनियम पीड़ि’त को दुख पहुंचाने” की ओर ले जाता है दुखद चोट के मामले में 10 साल और 3 लाख रुपये तक और मृ$त्यु के मामले में आजीवन कारावास और 1 ला’ख रुपये से कम और 5 लाख रुपये तक का कठोर कारावास।

इसके अलावा विधेयक के अनुसार जो लोग लिं’चिं’ग करने के लिए एक साजिश का हि’स्सा पाए गए या लिं’चिं’ग के एक अधिनियम को समाप्त कर दिया गया है उन्हें उसी तरह से दंडित किया जाएगा जैसे कि उन्होंने खुद ही लिं’चिं’ग किया हो।

साथ ही साथ विधेयक में अधिकतम एक साल की जे’ल अवधि और आक्रामक सामग्री फैला’ने या प्रकाशित करने या संचार करने वालों के लिए 50000 रुपये तक का जुर्माना भी प्रस्तावित है और अधिकतम तीन साल और एक व्यक्ति या एक व्यक्ति के समूह के लिए श’त्रुतापू’र्ण वातावरण बनाने वालों के लिए 1 लाख रुपये तक का जुर्माना।

नए विधेयक के मुताबिक़ राज्य पीड़ि’तों को सुरक्षा प्रदान करेगा जो कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत कानूनी सहायता पैनल से किसी भी वकील को चुन सकते हैं। इसी के साथ राज्य नि शुल्क चिकित्सा उपचार भी प्रदान करेगा और मुआवजा योजना के अनुसार मुआवजा प्रदान करेगा।

आपको बता दें कि विधेयक के अनुसार लिं’चिं’ग के मामलों की जांच केवल वि’शेष परिस्थि’ति’यों को छोड़क’र निरीक्षक के पद से ऊपर के पुलिस अधिकारियों द्वारा की जाएगी। यह बिल सोशल मीडिया पो’स्ट को ट्रै’क करने के लिए नोड’ल अधिकारियों को भी अनिवा’र्य करता है|

पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ महीनों में कई तरह के उत्पा’त देखने को मिले हैं जिनमें से विभि’न्न क्षे’त्रों विशेषकर उत्तर बंगाल में फैले बच्चा चोर की अफवा’हें शामिल हैं इन घट’नाओ अफवा’ओं और उत्पादों को म’द्दे नज़र रखते हुए बंगाल सरकार ने एंटी मोब लिं’चिं’ग बिल पास किया है|

साभारः #AajTak

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