एक मजदूर ने बयां किया दर्द, सुनकर दिल्ली के अफसरों की आंखों से छलके आंसू

देश भर में कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाव के लिए लगाए गए लॉकडाउन के चलते अपने गांवों और घरों से दूर रह कर काम करने वाले मजदूर संकट में आ गए हैं. अप्रवासी मजदूरों को शहरों में टिके रहने के लिए ना रोजगार है और ना खाने-पीने की व्यवस्था. ऐसे हालातों में मजदूरों के पास शहरों को छोड़कर गांव का रूख करने के आलावा कोई अतिरिक्त विकल्प नहीं रहा.

ऐसे में मजदूरों ने तपती गर्म सड़कों और लू की परवाह किये बिना अपने घरों के लिए निकल पड़े. लेकिन वह यह नहीं जानते थे कि उनके लिए यह राह भी आसन नहीं होने वाली हैं. उन्हें सड़कों के जरिए पैदल, साईकिल या गाड़ियों से जाने की इजाज़त नहीं मिली और बिना इजाजत आगे बढ़ने वालों को पुलिस के डंडों का भय सताता.

इन हालातों में एक मजदूर की ऐसी कहानी सामने आई है जिसे सुनकर बड़े-बड़े अफसरों की आंखों में भी पानी आ गया. बिहार के एक मजदूर ने अपना दर्द बयां करते हुए बोला साहब मेरे पास ना तो कोई बड़ी गाड़ी है और ना ही साइकिल है. मेरा आठ महीने का बच्चा दुनिया से चला गया है.

इस बच्चे को पाने के लिए मैंने बिहार के बड़े-बड़े मंदिर में जाकर मिन्नतें की थी. आठ वर्ष तक भगवान से विनती और प्रार्थना करने के बाद मुझे एक बेटा नसीब हुआ था. उसे दुनिया को अलविदा कहे तीन दिन हो चुके है और मैं एक ऐसा बदनसीब पिता हूं जो आखिरी समय में अपने बच्चे का चेहरा तक नहीं देख सका हूं.

उन्होंने अधिकारीयों से कहा कि मेरे पास कोई दौलत नहीं है जो आपकों दे सकूं और आप मुझे बिहार पहुंचा दो. आप मुझे पैदल ही बिहार जाने दीजिए ताकि मैं इस मुश्किल कड़ी में अपने परिवार का साथ दे सकूं, अपनी पत्नी से कह सकूं घबरा नहीं मैं एक सच्चे साथी की तरह इस कड़ी में तेरे साथ खड़ा हूं.

इस मजदूर का यह दर्द सुनकर प्रशासन के अधिकारियों की आंखें नम हो गई. इसके बाद इस मजदूर के दर्द की जानकरी पूर्वी जिले के जिलाधिकारी अरुण कुमार मिश्रा को दी गई तब उन्होंने तुरंत उसकी स्क्रीनिंग करा कर बुधवार को नई दिल्ली से बिहार जाने वाली एक विशेष ट्रेन में उसके लिए सीट बुक कराई.

इस मजदूर का नाम राम पुकार बताया जा रहा है यह बिहार के बेगूसराय के रहने वाले है. राम पुकार ने बताया कि वह नई दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में मजदूरी किया करते थे. उनकी पत्नी व दो बेटियां बिहार में रहती हैं. उनकी पत्नी ने आठ महीने पहले एक बेटे को जन्म दिया था. बच्चे की तबियत खराब थी और लॉकडाउन के चलते पत्नी डॉक्टर को नहीं दिखा सकी और तीन दिन पहले उसने दम तोड़ दिया.