कड़’वी सच्चाई सुनने की आदत डालें पीएम मोदी: बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम

केन्द्र की सत्ता में राज कर रही भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सलाह देते हुए अपना एक बयान दिया है| उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सलाह देते हुए कहा है कि उन्हें अप्रिय सच्चा’ई सुनने का स्वभा’व विकसित करना चाहिये और यदि वह अर्थव्यवस्था को संकट से बाहर निकालना चाहते हैं तो उन्हें अपनी सरकार के अर्थशास्त्रि’यों को डरा’ना बं’द करना होगा। इसके साथ ही स्वामी ने कहा कि जिस तरह से नरेंद्र मोदी सरकार चला रहे हैं उस तौर तरीके में बहुत कम लोग ही तय सोच के दायरे से बाहर निकल सकते हैं।

स्वामी ने कहा कि नरेंद्र मोदी को चाहिए कि वह लोगों को इसके लिये प्रोत्साहि’त करें ताकि वे उनके सामने कह सकें कि नहीं यह नहीं हो सकता है लेकिन मुझे लगता है कि वह अभी इस तरह की सोच विकसित नहीं कर पाये हैं|

बता दें कि सत्ताधारी दल के राज्यसभा सदस्य की तरफ से ये टिप्पणि’यां ऐसे समय में आईं हैं जब देश की आर्थि’क वृ’द्धि छह साल के नि’म्न स्तर पांच प्रतिशत पर आ गई है और सरकार इस सुस्ती से बाहर निकलने के लिये कई गैर परंपराग’त उपाय खोज रही है। इसी के चलते सरकार ने हाल ही में कंपनियों के लिये कर दर में बड़ी कटौती की है।

आपको बता दें कि सुब्रमण्यम स्वामी ने अर्थव्यव’स्था में मौजूदा संक’ट के लिये नोटबं’दी को भी दोषी ठहराया है। इस मामले में उन्होंने खासतौ’र से रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने वास्तविक मु’द्दों को नहीं उठाया और न ही ठीक से तैयारी की।

इसके साथ ही स्वामी ने माल एवं सेवाकर जीएसटी को जल्दबाजी में लागू करने को भी अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति के लिये जिम्मेदा’र ठहराया है। इसके चलते स्वामी ने यह भी कहा कि उच्च वृ’द्धि के लिये कौन सी नीतियों की जरूरत है सरकार उसे नहीं समझ पाई हैं।

वहीँ, स्वामी ने एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के चलते कहा था कि आज हमें ऐसे तरीकों की जरूरत है जिसमें हमारी अर्थव्यव’स्था के लिये एक अल्प’कालि’क, एक मध्यम अवधि और एक दीर्घ अव’धि की नीति होनी चलिए लेकिन आज ऐसा नहीं है, मुझे लगता है कि जो भी अर्थशास्त्री सरकार ने रखे हैं वे इतने ड’रे हुये हैं कि सच्चाई प्रधानमंत्री के समक्ष नहीं रख सकते हैं, जबकि प्रधानमंत्री का ध्यान खुद छोटी परियोजनाओं पर है।

साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का ध्यान छोटे और एकतरफा मुद्दों पर है जैसे कि गरीब महिलाओं को खाने पकाने की गैस वितरण वाली उज्ज्वला योजना लेकिन उन्होंने इस मौके पर बहुपक्षीय नजरिया अपनाने की जरूरत पर जोर दिया जो कि विभि’न्न पहलुओं को छुये।

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि ऐसा जरूरी नहीं है कि अर्थशास्त्र का ज्ञाता प्रधानमंत्री हो। इसी के चलते उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरंसिंह राव का उदहारण देते हुये कहा कि उनके पास मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाला वित्त मंत्रालय था जिसने 1991 के सुधारों को आगे बढ़ाया।

इसके साथ ही स्वामी ने एतिहासिक आर्थिक सुधारों के लिये नरंसिह राव की भूमिका को रेखांकित करते हुये कहा कि मनमोहन सिंह वित्त मंत्री रहते जितना कुछ कर पाये प्रधानमंत्री रहते हुये आर्थिक सुधारों के मोर्चे पर वह ज्यादा कुछ नहीं कर सके।

स्वामी ने कहा कि 1991 के सुधारों के लिये राव को 95 प्रतिशत श्रेय मिलना चाहिये और कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री को आगामी गणतं’त्र दिवस पर भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिये। इसके बाद पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बारे में स्वामी ने कहा कि वह चिदंबरम को व्यक्ति’गत रूप से बहुत कम जानते हैं। चिदंबरम के बारे में उन्हें केवल इतना पता है कि एक छात्र जो कि हार्व’र्ड बिजनेस स्कूल की एक कक्षा में फेल हो गया था।

साथ ही आपको बता दें कि सुब्रमण्यम स्वामी ने आयकर समाप्त करने की अपनी मांग को भी दोहराया और कहा कि इससे घरेलू बचत बढ़ेगी और वृ’द्धि तेज होगी। और साथ ही इससे कर आकलन से जुड़ा भ्र’ष्टा’चार भी कम होगा।

साभारः #Jansatta