सरकार अर्थव्यवस्था संभाल नहीं सकती तो पारिस्थितिकी कैसे संभालेगी: बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाई फटकार

सरकार अर्थव्यवस्था संभाल नहीं सकती तो पारिस्थितिकी कैसे संभालेगी: बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाई फटकार

मुंबई में मेट्रो कार शेड के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर आये दिन काफी विवाद देखने को मिल रहे हैं| मुंबई में विरो’ध प्रदर्शन काफी ज़ोर शोर से हो रहा है और इस का केस अब मुंबई के हाई कोर्ट में चल रहा है| इन सब के बीच अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को कहा कि जब सरकार उत्तम संसा’धन उपलब्ध होने के बाद राष्ट्रीय अर्थ’व्यव’स्था को नहीं संभाल सकती तो वह कैसे पारिस्थितिकी को संभाल पाएगी। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पी’ठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है।

आपको बता दें कि गोरेगांव में मेट्रो तृतीय परियोजना के वास्ते कार शेड का मार्ग प्रशस्त करने के लिए हरित क्षेत्र आरे कॉलोनी में 2600 से अधिक पेड़ों की कटाई का विरोध करते हुए यह जनहित याचिका दायर की गई है।

साथ ही पर्यावरण कार्यकर्ता जोरू बाथेना ने जनहित याचिका दायर कर बृहन्मुबई महानगरपालिका बीएमसी के वृक्ष प्राधिकरण से मुम्बई मेट्रो रेल निगम लिमिटेड को आरे क्षेत्र में 2646 पेड़ों को काटने के लिए 29 अगस्त को मिली मंजूरी को चुनौती दी है।

बता दें कि बाथेना के वकील जनक द्वारकादा’स ने सोमवार को दलील दी कि पेड़ प्रशासन ने निर्णय लेने में दिमा’ग नहीं लगाया और वृक्ष अधिनियम के प्रावधानों का पालन किये बगैर हड़ब’ड़ी में यह निर्णय लिया गया है।

इसके बाद उन्होंने कहा कि मेट्रो परियोजना महत्वपूर्ण है लेकिन जनहित में शहर की हरियाली भी, अधिक नहीं तो उतनी महत्वपूर्ण जरूर है। वहीँ दूसरी ओर द्वारकादास की दली’लें सुनने के बाद पीठ ने कहा कि विकास बनाम पर्यावरण विवाद का विषय है और इससे याचिकाकर्ता के तर्कों में एक नया बिं’दु जुड़ेगा।

बता दें कि न्यायमूर्ति नंदराजोग ने कहा कि सारे उत्तम संसाधन होने के बाद भी यदि सरकार राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था नहीं संभाल सकती है तो कैसे वह पारिस्थितिकी को संभाल पाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि उसके पास सर्वश्रेष्ठ अर्थशास्त्री हैं लेकिन फिर भी कुछ कमी तो है।

जानकारी के लिए बता दें कि इस मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।

साभार: #JantaKaReporter

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