VIDEO: मिड डे मील पहले बच्चों को रोटी-नमक खिलाएंगे फिर खबर करने वाले पत्रकारों पर मुकदमा चलाएंगे, वीडियो बनाने वाले पत्रकार को…

दुनिया का यह दौर मीडिया और रिपोर्टिंग का दौर है आज कल देखा जाए तो सभी यह जानते है कि मीडिया पावर ही सबसे बड़ी पावर है पर क्या यह पूरी तरह सही बात है? क्यूंकि हाल ही में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के एक स्कूल की वीडियो शूट कर सोशल मीडिया द्वारा सच बाहर लाने का एक मामला सामने आया है जिसका वीडियो बीते कुछ दिन पहले खूब वायरल हुआ था| दरअसल इस वीडियो में दिखाई दे रहा था कि स्कूल में बच्चे मिड डे मील के दौरान रोटी और नमक खा रहे थे और अब खबर मिली है कि जिस पत्रकार ने यह वीडियो बनाया था राज्य सरकार ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

बता दें कि यह मुकदमा पिछली 31 अगस्त को खण्ड शिक्षाधिकारी प्रेम शंकर राम की तहरीर पर दर्ज किया गया है। जिसमें पत्रकार पवन जायसवाल और स्थानीय ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राजकुमार पाल के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

इस मामले में दर्ज एफआईआर के मुताबिक यह पता चला कि जिस दिन वीडियो शूट किया गया था उस दिन स्कूल में मिड डे मील के तहत सिर्फ रोटियां बनी थीं। एफआईआर में इस बात का भी जिक्र है कि ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने स्कूल में सब्जियों का इंतजाम करने के बजाय रिपोर्टर को स्कूल परिसर में बुलाया और वीडियो शूट करायी थी।

एफआईआर के मुताबिक जनसंदेश टाइम्स’ के स्थानीय रिपोर्टर द्वारा वीडियो शूट किया गया और फिर इसे बाद में न्यूज एजेंसी एएनआई को भेज दिया गया। जहां से यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। आपको बता दें कि आरोपी पत्रकार और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि के खिलाफ धांधली और आपराधिक साजिश रचने का आरोप है।

बताया जा रहा है कि 22 अगस्त को मिर्जापुर के जमालपुर विकास खण्ड स्थित सियूर प्राथमिक विद्यालय की इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने इसकी जांच करायी थी और इस मामले में दोषी पाये जाने वाले दो शिक्षकों मुरारी और अरविंद कुमार त्रिपाठी को ससपेंड किया था।

बता दें कि केन्द्र सरकार की मिड डे मील योजना के तहत परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मेन्यू के हिसाब से दाल, चावल, रोटी सब्जी फल और दूध दिये जाने चाहिए ताकि उन्हें बेहतर पोषण मिल सके|

सरकार के अनुसार 2018 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 1.5 लाख प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में मिड डे मील योजना के तहत बच्चों को भोजन दिया जा रहा है। लेकिन क्या यह सच है?