केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ज्योति की मजबूरी को बताया टैलेंट, भड़के लोग कहा- तुम्हे शर्म नहीं आती

दुनिया भर में लागू लॉकडाउन के बीच अप्रवासी मजदूर अपने घरों की तरफ वापसी करने के लिए मजबूर हो रहे है. इसी बीच एक तस्वीर सामने आई जिसमें एक लड़की अपने घायल पिता को साइकिल पर बैठाकर गुड़गांव से बिहार के दरभंगा पहुंची. 15 साल की इस बच्ची का नाम ज्योति कुमारी है और सोशल मीडिया पर इनकी तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है और सभी ज्योति की हिम्मत की खूब तारीफ कर रहे हैं.

इसी बीच केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी ज्योति कुमारी की तारीफ की है. मंत्री ने ज्योति को हिम्मती बताते हुए उसकी खूब सराहना की. प्रसाद ने अपने ट्वीट में केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू से ज्योति के इस टैलेंट को पहचानने की बात भी कही है.

बता दें कि इससे पहले भारतीय साइक्लिंग फेडरेशन (सीएफआई) ने भी ज्योति ट्रायल देने का मौका देने की बात कही थी. सीएफआई ने उन्हें दिल्ली आकर ट्रायल देने के लिए कहा और अगर वह ट्रायल पास कर लेती है तो उन्हें अत्याधुनिक नेशनल साइक्लिंग अकादमी जो आईजीआई स्टेडियम परिसर दिल्ली में स्थित में प्रशिक्षु के तौर पर चुन लिया जाएगा.

अपने ट्वीट में रविशंकर प्रसाद ने लिखा कि बिहार की एक लड़की के साहस के बारे में सुना. वह अपने पिता के साथ गुरुग्राम से दरभंगा तक 1000 से ज्यादा किलोमीटर तक साइकिल चला कर गई. मैंने उसकी प्रतिभा निखारने के लिए खेल मंत्री किरण रिजिजू से बातचीत की है.

इसके साथ ही खेल मंत्री रिजिजू से बिहार की इस साहसी लड़की को प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति के द्वारा पूर्ण समर्थन देने का अनुरोध भी किया है. अगर वह लड़की इच्छुक हैं, तो हम उन्हें एक साइक्लिस्ट के रूप में विकसित कर सकते है.

प्रसाद के इस ट्वीट के बाद कई लोग भड़क गए और उन्हें ट्रोल करने लगे. एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा कि आपने 6 साल में देश का यह हाल कर दिया है कि एक बेटी को मजबूरी में 1200 किमी तक अपने पिता को लाद कर साइकिल से जाना पड़ रहा है. पर शर्म तो आएगी नहीं.

वहीं एक अन्य यूजर ने कमेन्ट किया कि मोदी जी चाहते तो मजदूरों को ट्रेन से भेज सकते थे लेकिन उन्होंने दिमाग से काम लेकर ओलंपिक के लिए खिलाड़ी ढूंढ लिए. वहीं एक और यूजर ने कहा कि यह नेता जनता को कितना बेवकूफ समझते हैं, गरीबी और लाचारी को कैसे घुमा फिरा कर टैलेंट का नाम दे दिया सच में जनता बेवकूफ ही है.

आपको बता दें कि ज्योति ने अपने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बैठा कर गुड़गांव से दरभंगा तक का सफर किया था इस दौरान ज्योति ने करीब 1200 किमी की दूरी 8 दिनों में तय की. इस बीच ज्योति ने रोजाना 100 से 150 किमी तक साइकिल चलाई थी.