बेमिसाल क़िस्सा: जब मुसलमानों के चरवाहे ऐसे हैं तो इनके उल्मा कैसे होंगे?

यह एक पुराने ज़माने का किस्सा है जो एक यहुदी आलिम और चरवाहे के बारे में है| बहुत पहले की बात है मुसलमानों का एक गाँव हुआ करता था, एक दिन उस गाँव के पास से एक यहूदी आलिम का गुज़रना हुआ| मुसलमानों की बस्ती देख यहुदी आलिम ने सोंचा क्यों न इस गाँव के अनपढ़ और भोले-भाले लोगों को इस्लाम के बारे में उनके दिल में शक पैदा कर दूं, जिससे इस गाँव के लोगों में इस्लाम के बारे में ग़लतफ़हमी पैदा हो और वे लोग दीनी तालीम और उल्माओं से दूर हो जाये|

शैतानी दिमाग ने अपना काम करना शुरू कर दिया था

आलिम अपने ज़ेहन में यह सोचता हुआ उस गांव में दाख़िल हो चुका था| थोड़ा आगे जाने पर सबसे पहले उसकी निगाह एक चरवाहे पद पड़ी, तो उसने सोचा कि क्यों न इस जाहिल से दिखने वाले चरवाहे को ही अपना पहला शिकार बनाया जाय| तो वह आलिम उस फटेहाल चरवाहे के पास गया और उससे मुलाक़ात की, यहुदी आलिम ने उस चरवाहे से कहा भाई में एक मुसलमान हूँ और मुसाफिर हूँ कई दिन से सफ़र में हूँ|

सलाम दुआ के बाद बैटन का सिलसिला चला तो यहुदी कहने लगा के हम मुसलमान लोग कितनी मुशक़्क़त से क़ुरआन मजीद को याद करते हैं, तो चरवाहे ने उसकी हाँ में हाँ मिला दी| फिर वो यहूदी आलिम बोला कि तुमने कभी गौर किया है क्या, क़ुरआन मजीद में बहुत सी आयत ऐसी भी हैं जो एक दुसरे से काफी मिलती-ज़ुलती हैं| और वो बार बार दोहराई गई हैं|

अगर हम इन आयतों को क़ुरआन मजीद से निकाल दें तो क़ुरआन मजीद और थोड़ा छोटा हो जाएगा और फिर हमको याद करने में और भी ज्यादा आसानी हो जाएगी, मतलब एक तरह से इसमें से वज़न कम हो जाएगा|वो चरवाहा उसकी बात ग़ौर से सुन रहा था और तब तक वो ख़ामोश रहा, जब यहुदी की बात मुकम्मल हो गई| फिर इसके बाद चरवाहा बोला ‘वाह’ तुम्हारा क्या ख़्याल है ये तो बहुत अच्छा है|

दिल ही दिल शैतान ख़ुश हुआ

अब यहुदी दिल ही दिल में बडा ख़ुश हो रहा था कि ये चरवाहा मेरे बुने जाल में फंस चुका है, और अब ये वोहे करेगा जो मैंने बताया है| फिर अचानक चरवाहे ने कहा मेरा एक सवाल है तुमसे भी, बोलो अगर वो मान लोगे तो में भी तुम्हारी बात मन लूँगा| उसकी ये बात सुनकर यहुदी ने फ़ौरन हामी भर दी और बोला पूछो मुझे कोई आपत्ती नहीं|

अब चरवाहा बोला तुम चाहते हो के क़ुरआन मजीद से मिलती जुलती आयत को निकाल देना चाहिये, जिससे क़ुरआन का वज़न कम हो जाए और याद करने में आसानी हो जाए, है न| जी-जी बिलकुल यही तो मैं चाहता हुं, यहुदी आलिम झट से बोला पड़ा|

चरवाहे ने कहा मुझे ऐसा लगता है के तुम्हारे बदन पर भी बहुत सी ऐसी चीज़े हैं, जो दिखने में एक जैसी हैं तो उन्हें भी बदन से काट कर अलग कर देना चाहिये| दो हाथ हैं जबकी आप काम तो एक हाथ से भी कर सकते हैं| इसलिये में आपका दूसरा हाथ काट देना चाहता हूँ| इसके अलावा दो पैर भी हैं, लेकिन एक पैर से भी इंसान ज़िंदगी गुज़ार सकता है तो ये दूसरा पैर भी काट देना चाहिये ताकी बदन का वज़न कम हो सके|

दो आंखों की क्या ज़रुरत है एक आंख से भी तो दुनिया दिखाई देती है| दो कानों की भी ज़रुरत नही है दो फेफडे दो गुर्दों इन सबकी ज़रुरत तो है ही नही तो बिला वजह तुम भी अपने बदन का बोझ बढ़ा रखे हो, चलिए पहले इनको काट कर फेंक देते हैं| इन सब चीज़ों का कोई खास काम भी नहीं… बोलो क्या ख़्याल है?

चरवाहे के हाथ में कुल्हाड़ी थी जो वो उस वक़्त बात करते करते उसको लहरा रहा था| यह देख और उसकी बातें सुन उस यहुदी आलिम का हलक सूख गया और वो बुरा सा मुंह बना कर उठ खडा हुआ और ये कहते हुए एक तरफ चल पड़ा मुझे बहुत लंबा सफ़र तय करना है, देर भी बहुत हो चुकी है शायद मुझे निकलना चाहिए… और ये कहते हुए तेज़ी से वो यहुदी आलिम गाँव से निकल पड़ा और वो रस्ते में ये सोचता हुआ जा रहा था कि मुसलमानों के चरवाहे ही ऐसे हैं तो इनके उल्मा इकराम कैसे होंगे|