VIDEO: जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री नहीं प्रधानमंत्री होते थे, ऐसे लागू हुई धारा 370

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आ$तंकी हमले के बाद देश भर में आक्रोश का माहौल है वहीं जम्मू-कश्मीर में तनाव की स्थिति बनी हुई है. ऐसे समय में सोशल मीडिया से लेकर हर चौक-चौराहे तक अनुच्छेद 370 पर चर्चा चल रही है. लोग जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने की मांग कर रहे है. वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अलगे सप्ताह सुनवाई होने वाली है. आपको जानकर हैरानी होगी कि जम्मू कश्मीर के भारत का एक राज्य होने के बावजूद भी साल 1965 तक मुख्यमंत्री नहीं बल्कि प्रधानमंत्री होते थे.

महाराज हरि सिंह और पंडित जवाहर लाल नेहरू ने राज्य का प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला को नियुक्त किया था. फिर साल 1965 में पहले चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी के नेता गुलाम मोहम्मद सादिक जम्मू कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री बने थे. अनुच्छेद 370 को जुडी कुछ खास बातें आज हम आपको बताने जा रहे है.

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अंग्रेजों से 1947 में आजादी मिलने के बाद कई छोटी-छोटी रियासतों को भारतीय संघ में विलय हुआ. इस बीच जम्मू-कश्मीर ने खुद को स्वंत्रत रखने का फैसला लिया लेकिन इसी दौरान पाकिस्तान ने उस पर आक्रमण कर दिया. जिसके बाद कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने कश्मीर का भारत में विलय करने का प्रस्ताव रखा.

लेकिन समय के आभाव में भारत में विलय करने की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी. युद्ध के हालात को देखते हुए भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष रहे एन गोपाल स्वामी आयंगर ने संघीय संविधान सभा में 306-ए पेश किया जिसे बाद में 370 का रूप दिया गया.

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अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों से अलग अधिकार देता है. भारत के अन्य राज्यों के लोग जम्मू कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं. जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा है और वित्तीय आपातकाल लगाने वाली अनुच्छेद 360 भी जम्मू कश्मीर पर लागू नहीं होती.

इसके आलावा भारतीय संसद को जम्मू-कश्मीर में रक्षा, विदेश मामले और संचार के अलावा कोई अन्य कानून बनाने का अधिकार नहीं किया गया है. भारत के सभी राज्यों में लागू होने वाले सभी कानून जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होते है. संविधान के भाग 21 के अनुसार जम्मू कश्मीर को अस्थाई, परिवर्ती और विशेष प्रबंध वाले राज्य का दर्जा दिया गया है.

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भारत सरकार को रक्षा, विदेश मामले और संचार के आलावा अन्य विषय पर कानून लागू करने के लिए राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए होता है. जब शेख अब्दुल्ला को राज्य का प्रधानमंत्री नियुक्त किया था तो उन्होंने राज्य के लिए कभी न टूटने वाली लोहे की तरह स्वायत्तता की मांग की थी लेकिन इसे केंद्र ने ठुकरा दिया था.

राज्य के सभी नागरिक एक अलग कानून के दायरे में आते है जिसमें नागरिकता संपत्ति खरीदने का अधिकार और अन्य मूलभूत अधिकार शामिल हैं. इसी के चलते देश के अन्य राज्यों के नागरिक इस राज्य में किसी भी तरीके की संपत्ति नहीं खरीद सकते हैं. इसे लेकर अलगे हफ्ते सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर सकता है.

 

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