जानिए क्या है नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी, और क्यों हो रहा है इसका विरोध?

देश भर में पिछले कुछ दिनों से आप ख़बरों में लगातार ‘नागरिकता संशोधन एक्ट’ (CAA) और एनआरसी (NRC) का नाम सुन रहे हैं. क्या आप जानते हैं की नागरिकता संशोधन एक्ट (Citizenship Amendment Bill) क्या है?. यह कानून किसके लिए बना है, और एनआरसी क्या है? इस पोस्ट में आपको बिलकुल साधारण तरीके से इन दोनों के बारे में बताया जायेगा. जिससे आपके मन में भी किसी तरह की ग़लतफहमी न रहे.

हमने कई लोगों से पूछताछ की, जिसके बाद जानकर बड़ी हैरानी हुई कि दरअसल विरोध करने वालों को खुद भी पूरी तरह से इनके बारे में जानकारी नहीं है. अधिकतर जानते ही नहीं कि नागरिकता संशोधन एक्ट और एनआरसी क्या है? और वे इसका विरोध क्यों कर रहे हैं.

CAA or NRC Kya Hai

नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी है क्या?

इसलिए इस पोस्ट में आपको, ‘नागरिकता संशोधन कानून’ (CAA) और एनआरसी (NRC) क्या है. इसके बारे में सरल तरीके से समझाया जायेगा. अधिकतर लोगों की मानसिकता ऐसी होती है कि वह अक्सर भी’ड़ का हिस्सा बन जाते हैं.

अगर हमारे कॉलेज, यूनिवर्सिटी या फिर हमारा समुदाय, अगर किसी चीज का विरो’ध कर रहा है तो हम कई बार बिना सोचे समझे उसमें शामिल हो जाते हैं. हम यहां यह नहीं कह रहे कि आपको इसका विरो’ध करना चाहिए या नहीं करना चाहिए. हम केवल आपको इस मुद्दे पर समझाने की कोशिश कर रहे हैं.

नागरिक संशोधन कानून को लेकर विरो’ध की शुरुआत सबसे पहले, भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम से हुई. इसके बाद यह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, से होते हुए दिल्ली के जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी (Jamia Millia Islamia) में फ़ैल गई.

वही देश के कई राज्यों में नागरिकता कानून को लेकर, विरो’ध प्रदर्शन जारी है. इतना ही नहीं इस कानून का विरोध देशभर में फैलने के बाद विदेशों तक में इसकी आवाज़ उठी इसकी सबसे बड़ी वजह रही दिल्ली की जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी, क्योंकि यहाँ पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने यहाँ पढने वाले छात्र-छात्राओं की बेरह’मी से पि’टा’ई की और आं’सू गै’स के गोले भी दा’गे.

छात्रों के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार का नतीजा यह हुआ कि देश के लगभग सभी विश्विद्यालय दिल्ली की जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी के समर्थन में आ गए. जिनमें बनारस हिन्दू विश्विद्याल भी शामिल था. अमेरिका समेत अन्य 20 से भी ज़्यादा विदेशी यूनिवर्सिटीयों ने भारत की जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी के छात्रों को समर्थन दिया.

अगर राजनीतिक विरो’ध की बात की जाए तो इस कानून का विरोध ‘कांग्रेस’ की महासचिव ‘प्रियंका गांधी’ ने इंडिया गेट पर धरने पर बैठ नागरिकता कानून का विरो’ध किया. उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ‘ममता बनर्जी’ ने भी 25 हज़ार लोगों के साथ, एक विशाल पैदल मार्च निकाला.

इसके अलावा बॉलीवुड से भी फिल्मी दुनिया की कई हस्तियां, इस नागरिकता कानून के विरो’ध में आ गयीं. दिल्ली के वकीलों ने भी मार्च निकालकर इस नागरिकता कानून का विरो’ध किया. बाकि आम नागरिक जिसमें सभी धर्मों के लोग शामिल हैं सबने संविधान की रक्षा के लिए एकजुटता दिखाई.

नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) के बारे में पूरी जानकारी

CAB यानी कि सिटिजन अमेंडमेंट बिल Citizenship Amendment Bill, जो लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में पास होने और राष्ट्रपति की मोहर लगने के बाद नागरिक संशोधन कानून (CAA) बन गया है.

इस कानून के तहत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के ऐसे नागरिक जो वहां से किसी भी तरह की परेशानियों की वजह पलायन करके आएंगे तो उन लोगों को भारत देश में, इस कानून के तहत नागरिकता दी जाएगी.

आपको बता दें कि इनमें सिर्फ 6 कौम के लोग ही होंगे जो भारत में इन नागरिकता एक्ट के तहत नागरिकता लेने के लिए पात्र माने जायेंगे. जैसे हिंदू, ईसाई, जैन, सिख, पारसी और बौद्ध धर्म के लोग. मुस्लि’म धर्म के लोगों को इस कानून के तहत अलग रखा गया है. उन्हें भारत में नागरिकता लेने का अधिकार नहीं होगा.

ऐसे अवैध प्रवासि भी भारत में नागरिकता ले सकेंगे, जो 31 दिसंबर 2014 की तारीख तक भारत की सीमा में दाखिल हो चुकें हों. ऐसे लोगों को भारतीय नागरिकता पाने के लिए, सरकार के पास आवेदन करना होगा.

अभी तक हमारे देश में दूसरे देश के लोगों को, भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए भारत में 11 साल तक रहना ज़रूरी था. लेकिन अब नए कानून CAA के हिसाब से उसमें प्रावधान बना दिया गया है कि पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक अगर पांच साल से भारत में रह रहें हों तो ऐसे लोग भी यहाँ की नागरिकता लेने के लिए पात्र माने जायेंगे.

इस नए नागरिकता कानून में यह भी व्यवस्था की गयी है, यदि उसके विस्थापन या फिर देश में अवैध रूप से रहने की वजह से पहले से कोई भी कानूनी कार्रवाई चल रही हो तो भी उनकी पात्रता प्रभावित नहीं होगी.

ओसीआई कार्डधारक यदि किसी भी प्रकार से, शर्तों का उल्लंघन करते हैं तब ऐसे में उनके कार्ड की मान्यता को रद्द करने का केंद्र को अधिकार रहेगा. लेकिन उससे पहले उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जायेगा.

क्यों हो रहा है नागरिकता कानून (Citizenship Amendment Act) का विरोध?

दोस्तों आपको बता दें कि देश के पूर्वोत्तर राज्यों में, इस नए बदले हुए कानून का विरोध इसीलिए हो रहा है क्योंकि वहां पर पिछले कुछ दशकों से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से बड़ी तादाद में आए हिंदू और मुस्लि’म दोनों ही समुदाय के लोग शामिल हैं.

इस नए कानून के अनुसार हिन्दू, जैन, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी जैसे धर्म के अवैध नागरिकों को तो नागरिकता दे दी जायेगी, लेकिन इनमें से मुस्लि’म धर्म के लोगों को नागरिकता पाने के लिए अपात्र माना जायेगा.

अगर इस देश का मुसलमा’न चाहे वह पिछले 100 वर्षों से भी इस देश में रह रहा हो, यदि वह एनआरसी लागू होने के बाद अपनी नागरिकता सिध्ध नहीं कर पाया तो वह भारत का नागरिक नहीं कहलायेगा.

इसी बात को लेकर इस कानून का जमकर विरोध हो रहा है. क्योंकि उसको किसी भी तरह की रहत जैसी कोई बात इस नए कानून में नहीं दी गयी है.

आपको एक बार फिर जाता दें कि भारत में पड़ोसी देशों से आये हिंदू और मुस्लमा’न दोनों ही बड़ी संख्या में भारत में अवैध तरीके से बसे हैं. नए कानून में मुसलमा’नों को छोड़कर सभी के लिए इस देश में नागरिकता पाने के अधिकार के लिए रास्ते खुले हैं.

NRC क्या है?

दोस्तों एनआरसी (NRC) का मतलब है, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (National Register of Citizens). एनआरसी एक तरह से भारत के राज्यों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सूची है. भारत में सबसे पहले NRC को असम में लागू किया गया था.

NRC की प्रक्रिया साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश बाद शुरू हुई थी. भारत सरकार पूरे देश में यह एनआरसी लागू करना चाहती है.

CAA और NRC में क्या अंतर है?

एनआरसी और नागरिकता कानून में सबसे बड़ा अंतर यह है कि एनआरसी को धर्म के आधार पर नहीं लिया गया. जबकि नागरिक संशोधन कानून (CAA) में छह प्रमुख धर्मों के लोगों को जगह दी गई है.

मुझे उम्मीद है कि अब आपको आसानी से सारी बात समझ आ गयी होगी कि नागरिकता संशोधन एक्ट क्या है, एनआरसी किसे कहते हैं और इन दोनों में क्या अंतर है.