जो शख्स मुस्लि’म नामों को बर्दाश्त नहीं कर सकता वह मुसलमा’नों को क्या खाक बर्दाश्त करेगा, निशात खान

नई दिल्ली: पिछले कई हफ्तों से सैकड़ो की तादाद में सड़कों पर उतरे लोग नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे है। नागरिकता कानून के खिलाफ दिल्ली में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे है। दक्षिण दिल्ली के ओखला, जामिया और कालिंदी कुंज इलाके में छात्र एवं स्थानीय नागरिक बड़ा विरोध प्रदर्शन कर रहे है।

वही पिछले कई दिनों से दक्षिणी दिल्ली के ओखला के जाकिर नगर के लोग भी नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजिका के खिलाफ जलती मोमबत्तियां लेकर सड़क किनारे प्रदर्शन कर रहे हैं. जामिया यूनिवर्सिटी से लगभग एक किलोमीटर दूर बसा यह इलाका सीएए के विरोध में हुए प्रदर्शनों और उनके खिलाफ पुलिस की क्रूरता का केंद्र रहा है।

आपको बता दें 12 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून के दोनों सदनों में पारित हो जाने के बाद से ही सीएए के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। जहाँ देश भर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पी’टा, उन पर आं’सू गै’स से हम’ले किए और सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया। वही कई जगह तो पुलिस की गोली से भी कई लोगो की जा’न चली गई।

वही ओखला के जाकिर नगर की रहने वाली निशात ने बताया की 23 दिसंबर की रात जब मैं जाकिर नगर के इस जुलूस को देखने पहुंची, तो स्थानीय मस्जिद की ओर जाने वाली सड़क के दोनों तरफ लोग शांति से खड़े थे. बच्चे शायर अल्लामा इकबाल की नज्म “सारे जहां से अच्छा” गा रहे थे इस दौरान वहां मौजूद लोग इस नए कानून के परिणामों के बारे में बातचीत करने में लगे थे।

सड़क के एक तरफ, जहॉ सैकड़ो औरतें पोस्टर थामें नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को रद्द किए जाने के नारे लगा रहीं थीं. क्योकि इन औरतो का किसी सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन में भाग लेने का यह पहला मौका था। निशात ने आगे कहा की इससे पहले हम कभी सड़कों पर नहीं उतरे, लेकिन आज सवाल पूरे देश का है।

वही निशात ने कहा की हजारो औरतो के हाथो में पोस्टर थे और इन पोस्टर पर लिखा था, ला’ठी, गो’ली नहीं, रोजगार, रोटी दो. वही अन्य प्रदर्शनकारियों के बारे उन्होंने बताया की बुर्का और हिजाब पहनने वाली औरतें अपने हकों के लिए यहां डटी हुई हैं। और ये औरतें दिन के समय जामिया में विरोध प्रदर्शन में शामिल हो रही हैं और फिर शाम को अपने इलाके में हो रहे विरोध में भाग लेती हैं।

निशात ने कहा की प्रधानमंत्री मोदी ने आज तक एक भी अच्छा फैसला नहीं लिया है. वह आम आदमी पर बोझ बढ़ाते हैं, चाहे नोटबंदी हो, जीएसटी हो या बाबरी मस्जिद का मामला हो. उनके अब तक के किसी भी फैसले का लोगों की भलाई से कुछ लेना-देना नहीं है। इस दौरान एक अन्य प्रदर्शनकारी शबाना खान ने कहा कि वे इन विरोधों में भाग लेने में कोई डर या शर्म महसूस नहीं करतीं।

क्योंकि हमने हिं’सा का सहारा नहीं लिया है। शबाना ने कहा, जब तक मोदी सरकार कानून वापस नहीं लेती, इंशा अल्लाह तब तक हम विरोध जारी रखेंगे. जनता से मेरी अपील है कि हम आपके लिए खड़े हुए हैं इसलिए आप हमारे लिए खड़े रहिये।

वही प्रदर्शनकारी औरतों ने कहा कि बीजेपी सरकार देश के इतिहास के हर उस पहलू को मिटा रही है जिसमें मुसलमा’न शामिल हैं। अगर किसी शहर का नाम मुस्लि’म नाम पर है तो इससे आपको क्या दिक्कत है? एक ऐसा शख्स जो मुस्लि’म नामों को बर्दाश्त नहीं कर सकता, वह मुसलमा’नों को कैसे बर्दाश्त कर सकता है?

साभार: hindi.caravanmagazine.in