Citizenship Amendment Bill 2019: मोदी सरकार के ख‍िलाफ सात राज्‍यों ने उठाया व‍िरोध का झंडा

Citizenship Amendment Act 2019: नागरिकता संशोधन बिल सोमवार को आधी रात लोकसभा में पास हो गया। बिल पारित होते ही विरोध में मंगलवार को असम, त्र‍िपुरा, मेघालय आद‍ि राज्‍यों में ह‍िं#सा भड़की हुई है। लोग सड़कों पर उतर आए और जगह-जगह आ’गजनी कर प्रदर्शन करने लगे। बिल को लेकर संसद में कांग्रेस सहित कई दलों ने यह कहते हुए विरोध किया कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

धर्म के आधार पर नागरिकता देना गलत कदम है। वही देश भर के लोगों ने ट्वीट करके इस बिल के खिला’फ तीखी प्रतिक्रिया दी है तो वही पीएम नरेंद्र ने बिल के पास होने पर खुशी जाहिर करते हुए गृहमंत्री अमित शाह की प्रशंसा की। आलोचना करते हुए एक अमेरिकी आयोग ने राज्यसभा से भी बिल के पारित होने के बाद अमित शाह सहित कई नेताओं पर प्रतिबंध की मांग की है।

विधेयक को असंवैधानिक करार देते हुए, पूर्व AG बोले- राज्‍यों को है लागू नहीं करने का हक

आपको बता दें नागर‍िकता संशोधन ब‍िल के खिलाफ कई राज्‍यों ने केंद्र के व‍िरोध का झंडा उठा ल‍िया है। इस ब‍िल के दोनों सदनों में पार‍ित होने के बाद उत्तर पूर्वी राज्य असम, त्र‍िपुरा, मेघालय आद‍ि में जमकर ह‍िं#सा भड़की हुई है। और अब नागरिकता संशोधन बिल को लेकर सात राज्‍यों ने अपने यहां लागू करने से साफ इनकार कर द‍िया है।

नागरिकता संशोधन विधेयक को असंवैधानिक करार देते हुए उन्होंने कहा क‍ि यह ब‍िल धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला, संव‍िधान और भारतीयता के ख‍िलाफ है। ब‍िल का व‍िरोध करने वाले राज्‍यों में मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, पंजाब, पश्‍च‍िम बंगाल, छत्तीसगढ़ और केरल शाम‍िल हैं।

वही इस बिल को लेकर पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी का कहना है क‍ि राज्‍यों के पास केंद्र द्वारा लागू कानून को अपने यहां नहीं लागू करने का संवैधान‍िक हक तो है, लेक‍िन यह सही कदम नहीं होगा। आदर्श स्‍थि‍त‍ि ये है क‍ि बातचीत से रास्‍ता न‍िकले और मतभेद दूर हो।

कुछ कानूनी व‍िशेषज्ञों की राय में नागर‍िकता केंद्र के दायरे में आने वाला व‍िषय है। इसल‍िए, राज्‍य सरकारों के इस ब‍िल को नहीं लागू करने के न‍िर्णय को केंद्र पलट सकता है। राज्‍यों की ओर से इसे नहीं लागू करने का ऐलान सही नहीं है।

हलाकि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके गांगुली ने कहा क‍ि राज्‍य सरकारें नागर‍िकता से जुड़े कानून को रोक नहीं सकतीं, क्‍योंक‍ि नागर‍िकता से जुड़ा हर मुद्दा केंद्र सरकार के दायरे में आता है। और केंद्र सरकार को ही यह तय करने का हक है क‍ि कौन इस देश का नागर‍िक होगा और कौन नहीं।