काँग्रेस पार्टी की साख बचाने के लिये मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने दिया ऑफर, कहा-कांग्रेस करे विचार हम….

राजनीति में कब किसे किसकी जरूरत पड़ जाए कुछ नहीं कहा जा सकता हैं. इसलिए ही कहा जाता है कि राजनीति में दुश्मनी और दोस्ती हमेशा के लिए नहीं होती है. ऐसा ही कुछ असम में देखने को मिल रहा है. लोकसभा चुनाव 2019 के समय कांग्रेस ने जिस एआईयूडीएफ पार्टी से गठबंधन करने से इनकार कर दिया था आज कांग्रेस को उसी की जरूरत पड़ रही है.

असम राज्य में अपना बड़ा जनाधार रखने वाली एआईयूडीएफ ने कांग्रेस से गठबन्धन की पेशकश की थी लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया और राज्य में वोटों के बंटवारे का कारण बनी है जिससे बीजेपी की राह आसन बन गई. वहीं एआईयूडीएफ आज कांग्रेस की इज्जत बचाने के लिए उसके साथ खड़ी हैं.

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दरअसल पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के राज्यसभा का कार्यकाल जून में खत्म होने जा रहा है. ऐसे में अब कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती है कि उन्हें कैसे राज्यसभा भेजा जाए. असम से राज्यसभा की दो सीटें ख़ाली हो गई हैं और इसको लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी गई है.

मनमोहन सिंह 1991 से असम से ही राज्य सांसद हैं और इस बार जून में रिटायर हो रहे हैं. वहीं असम में एक सीट जीतने के लिए 42 वोट की जरूरत है. बीजेपी की अपनी सीटें 61 हैं यानि की वह एक सीट  अपने दम पर आसानी से जीत सकती है.

कांग्रेस असम से ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह फिर से राज्यसभा भेजना चाहती है. सिंह एक ऐसे नेता हैं जिनका सम्मान सभी विपक्षी दलों में होता है लेकिन असम में कांग्रेस के विधायकों की संख्या कम है. कांग्रेस के पास सिर्फ 25 विधायक है और ऐसे में उसे समर्थन की ज़रूरत है.

ऐसे में कांग्रेस की इज्जत बचाने के लिए असम की विधानसभा में 13 सीटों रखने वाली AIUDF ने अप्रत्यक्ष समर्थन की पेशकश की है. इस बारे में पार्टी के अध्यक्ष बदरुद्दीन अमल ने एक अहम् बयान दिया है. बदरूद्दीन अजमल चाहते हैं कि कांग्रेस दूसरी सीट से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उतारे.

असम विधानसभा में 14 विधायक असम गण परिषद के हैं जबकि बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट के 12 विधायक हैं. असम गण परिषद के नेता नहीं चाहते कि कोई बाहरी यहां से राज्यसभा जाएं ऐसे में अगर बीजेपी ने किसी बाहरी को उतारा तो असं गण परिषद भी मनमोहन सिंह को वोट कर सकते हैं.