Home desh मुस्लिम समाज का बड़ा एलान- दहेज़ लेने वालों या मांग करने वालों का होगा सामाजिक बहिष्कार

मुस्लिम समाज का बड़ा एलान- दहेज़ लेने वालों या मांग करने वालों का होगा सामाजिक बहिष्कार

मुस्लिम समाज का बड़ा एलान- दहेज़ लेने वालों या मांग करने वालों का होगा सामाजिक बहिष्कार

हमारे देश में दहेज प्रथा को लेकर पहले से ही कानून है, जिसके तहत दहेज की मांग करना या दहेज़ लेना गैरकानूनी है| जिसके तहत सजा तक का प्रावधान है. पिछले कुछ सालों में हम देखते आ रहे हैं दहेज की वजह से न जाने कितनी बहन बेटियों ने अपनी जान गवा दी है| हालाँकि दहेज़ प्रथा का विरोध तो कई पीड़ियों से होता हुआ आ रहा है, लेकिन कहीं न कहीं ये बाबी जुबां से अधिकतर ऐसे लोगों के लिए चुप्पी साधने पर मजबूर हो जाते हैं जिनके यहाँ शादी के लिए लड़के हैं|

प्रथा

लेकिन दहेज़ रूपी दानव ख़त्म होने के वजाए फलता-फूलता जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह भी है कि लोग जब शादी करते हैं तो अपनी हैसियत से दिखावे के टूर पर कहीं बढ़कर पैसा खर्च करते हैं. जिसका खामियाजा माध्यम वर्गीय या उससे भी नीचे के तबके के लोगों को भुगतना पड़ता है.

dahej prta

अधिकतर शादियां इस तरह से की जाती हैं कि कई गैर जरूरी कामों को सिर्फ दिखावे के लिए ही किया जाता है जिसमें काफी फिजूल खर्च होता है. लोग समझदारी से काम लें और फिजूल खर्चे से बचें तो पैसे की बचत तो होगी ही, साथ ही किसी दूसरे परिवार को भी अपनी बेटी की शादी में अपनी हैसियत से बढ़ा चढ़ाकर खर्च नहीं करना पड़ेगा.

Muslim Wedding Planner

इन सब बातों को देखते हुए मुस्लिम समाज के उलेमाओं ने एक जरूरी एलान किया है, जिसके तहत दहेज की मांग करने वाले परिवारों या दहेज़ लेने वाले शादी वाले घरों का सामाजिक तौर से बहिष्कार किया जाएगा. ना तो उन्हें कभी समाज में सार्वजानिक कार्यक्रम में बुलाया जाएगा और ना ही किसी शादी का न्योता भेजा जाएगा.

The Muslim Couple

इस मुहीम की शुरुआत मुजफ्फरपुर से चालू हो चुकी है. और यहाँ के मौलानाओं ने भी फरमान जारी कर दिया है कि अब ऐसी शादियों में भी कोई काजी निकाह पढ़ाने के लिए नहीं जायेंगे जहाँ दहेज प्रथा जैसी कुरीती देखने को मिल रही हो. इसके अलावा नशाखोरी करनेवाले लड़के का भी निकाह पढ़ाने का बहिष्कार किया जाएगा.

The Muslim Wedding and Kazi

इन सब के पीछे मुस्लिम समाज में फ़ैली बुराइयों को दूर करने के उद्देश्य और युवाओं में नशाखोरी और अन्य सामाजिक बुराई से दूर करने की कोशिश की जा रही है. आपको बता दें कि दहेज़ लेना और देना शरीयत के भी खिलाफ है. दहेज न लेना ही अल्लाह के हुकुम और हुज़ूर साहब के बताये रास्ते पर चलना है.

बहरहाल उम्मीद की जा रही है कि ये एक छोटा सा प्रयास कुछ सालों में मुसलमानों की दिशा और दशा बदलकर रख देगा. और एक नयी पीढी का आगाज़ होगा. जैसा कि साहबों ने कोशिश की थी.

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