बड़ी खबर: अमित शाह पर बैन लगाने की मांग, नागरिकता बिल पर अमेरिकी आयोग हुआ नाराज़

भारत में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नागरिकता संशोधन बिल के पेश किये जाने के बाद, इसको लेकर एक अमेरिकन कमीशन आयोग ने विधेयक को एक खतरना’क कदम करार दिया है. इस संस्था ने मांग की है, अगर यह बिल संसद में पास होता है तो इस स्थिति में भारत के गृह मंत्री अमित शाह के खिला’फ प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है. आपको बता दें कि ये एक अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता संघीय, अमेरिकी आयोग है.

भारत में नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर लोकसभा में इसे पेश किये जाने के दौरान भी इसका जमकर विरोध किया गया था. हालांकि इस बिल के फेवर में ज्यादा वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में केवल 80 वोट ही पड़े. जिसके चलते इसको लोकसभा में मंजूरी दे दी गई है.

Amit shah and pm modi

अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा, और उस दौरान अमित शाह ने कहा भी था कि इस बिल में ऐसी कोई बात नहीं है. जिससे संविधान के किसी नियम का उल्लंघन किया गया हो. विपक्ष अगर चाहता है, तो मैं उसके हर सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं.

इसके साथ ही उन्होंने विरोध कर रहे, विपक्षी दलों से कहा कि जनता ने हमें बहुमत से चुना है, इसलिए आपको हमें 5 साल सुनना ही पड़ेगा. नागरिक संशोधन बिल का विरोध कांग्रेस पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने किया है.

आज तक डॉट इंडिया टुडे डॉट इन वेबसाइट के मुताबिक, लिखा है कि अगर नागरिकता संशोधन बिल दोनों सदन में पास हो जाते हैं तब ऐसी स्थिति में अमेरिकी सरकार को भारत के गृह मंत्री अमित शाह और कुछ अन्य मुख्य नेता नेताओं के खिलाफ प्रतिबंध लगाये जाने को लेकर विचार किया जाना चाहिए.

अमेरिकी आयोग के अनुसार, लोकसभा में जो नागरिकता संशोधन विधेयक पास हुआ है, जिसमें धर्म का जो आधार दिया गया है, वह उसको लेकर बेहद परेशान हैं. आयोग ने उन पर इस तरह का आरोप भी लगाया है कि इस बिल में मुस्लि’मों को छोड़कर बाकी प्रवासियों को नागरिकता पाने का रास्ता है. यह बिल नागरिकता को कानूनी दायरे में धर्म को आधार बनाया गया है.

इसके साथ ही यह भी बोला गया है, कि भारत सरकार पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से, उसके बयानों और उनकी सालाना रिपोर्ट को नजरअंदाज करती रही है. उन्होंने कहा कि यूपीए के कार्यकाल के दौरान भी, कई बार वे अलग-अलग मुद्दों पर स्टेटमेंट दे चुके हैं.

भारत की और से पहले ही यह कहा गया था और कई बार सभी देशों से बोल भी चुका है, कि भारत के अंदरूनी मामलों में किसी को भी दखल देने या उसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. यह हमारा अंदरूनी मामला है.

किसी संस्था के सुझाव हैं जो अधिकारी नहीं हैं, लेकिन अमेरिकन सरकार को खासकर विदेश मंत्रालय में ऐसे सुझाव को गंभीरता से लिया जाता है.

आपको बता दें कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी भारत के सिटीजन अमेंडमेंट बिल को भेदभाव वाला करार दिया है. उन्होंने कहा है कि यह बिल दोनों देशों के बीच तमाम द्विपक्षीय समझौतों का पूरी तरह से उल्लंघन है. और वह खासतौर से अल्पसंख्यकों और उनके अधिकारों को लेकर उनकी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंताजनक है.