सऊदी अरब के इस फैसले के बाद देश में एक बार फिर बेतहाशा बढ़ने वाले हैं डीज़ल-पेट्रोल के दाम

दिल्ली: डीज़ल-पेट्रोल के दाम: हमारे देश में पिछले लम्बे समय से डीज़ल पेट्रोल के दाम बढ़ते हुए चले आ रहे हैं. यहाँ तक के अब पेट्रोल और डीज़ल 100 रुपए से ऊपर ही बिक रहा है. थोड़े समय पहले ही इसमें स्तिरथा आयी थी और लगने लगा था जैसे के अब पेट्रोल डीज़ल की कीमतों पर लगाम लगेगी. लेकिन हाल ही में सऊदी अरब द्वारा एक फैसला लिया गया है, जिसकी वजह से एक बार फिर डीज़ल पेट्रोल की कीमतों में इज़ाफ़ा हो सकता है.

सऊदी अरब दुनिया भर मे कच्चे तेल का बड़ा निर्यातक है. पूरे एशियाई देशों की आपूर्ति अधिकतर सऊदी अरब के कच्चे तेल से ही होती है. वर्तमान में बढ़ती हुई मांग को देखते हुए अब सऊदी भी अपने कच्चे तेल के दामों में बढ़ोत्तरी कर सकता है.

डीज़ल-पेट्रोल के दाम एक बार फिर बढ़ेंगे?

हो सकता है के इसी महीने, यानि के जुलाई मे सऊदी अरब कच्चे तेल की कीमतों में 2.1 डॉलर प्रति बैरल के लगभग इजाफा कर सकता है. अगर ऐसा हुआ तो फिर हमारे देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छूने वाली हैं, और आम नागरिकों को इसकी मार झेलना पढ़ सकती है.

एक्सपर्ट का अनुमान था की सऊदी अरब कच्चे तेल की कीमतों मे इतनी बढ़ोतरी नहीं करेगा, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती मांग को लेकर होने वाली ये बढ़ोतरी ज़्यादा है. एक्सपर्ट के मुताबिक ये अनुमान था के कच्चे तेल की कीमतों में 1.5 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा बृद्धि नहीं होगी, जबकि यह एक्सपेर्टो के अनुमान के बिलकुल विपरीत होने वाला है.

हालांकि वर्तमान में जो देश कच्चे तेल का उत्पादन करते हैं उनमें ओपेक देशों में शामिल देश, जिसमें रूस, अंगोलिआ, नाइजीरिया जैसे देशों का भी तेल के उत्पादन में लक्ष्य पूरा करना मुश्किल लग रहा है.

सबसे बड़ी मुश्किल यह होगी. कच्चे तेल का सबसे बड़ा उत्पादक चीन है, और चीन मे Covid-19 के कारण शंघाई सिटी बंद थी, जिसे अब धीरे-धीरे खोला जा रहा है. जिससे के अब चीन को भी और अधिक कच्चे तेल की जरूरत पड़ेगी जिससे हो सकता है की कच्चे तेल की कीमतों मे और भी इजाफा हो.

कौन-कौन से देश रूस से तेल खरीदते हैं?

भारत और चीन अधिकतर तेल रूस से खरीदते हैं. हालाँकि कई देशो के प्रतिवंध के बावजूद भी भारत और चीन रूस से तेल खरीद रहे हैं. इसके पीछे का कारण रूस और यूक्रेन का युद्ध है, जिसके कारण कई देशों ने मिलकर रूस पर आर्थिक प्रतिबंद लगा दिए, जिसके कारण उसकी अर्थव्यवस्ता चरमरा सी गयी है.

अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस आदि देशों की नाराज़गी के बावजूद भी भारत रूस से कम कीमत पर कच्चा तेल खरीद रहा है, फिलहाल विश्व स्तर पर तेलों के दामों बढ़ोतरी हो रही है जिसका असर आम जनता पर पड़ता दिख रहा है, लगता नहीं के जल्द तेल के दामों में रहत दिखेगी.