अयोध्या फैसला: दिग्विजय सिंह ने बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर पूछा सवाल, ट्वीट हुआ वायरल

अयोध्या: रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया फैसला आने के बाद राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रिया आ रही है. रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले को लेकर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी ट्वीट कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने इसी के साथ एक सवाल भी पूछ लिया है. जो आज की शुर्खिया बना हुए है दिग्विजय ने लिखा कि SC ने बाबरी मस्जिद तोड़े जाने को गैरकानूनी बताया है।

आजतक की खबर के अनुसार, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा कि राम जन्म भूमि के निर्णय का सभी ने सम्मान किया हम भी आभारी हैं। कांग्रेस ने हमेशा से यही कहा था हर विवाद का हल संविधान द्वारा स्थापित कानून व नियमों के दायरे में ही खोजना चाहिये। वि’ध्वंस और हिं’सा का रास्ता किसी के हित में नहीं है।

इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने बीजेपी और संघ पर बिना नाम लिए निशाना भी साधा है। उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा है कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने राम जन्म भूमि फ़ैसले में बाबरी मस्जिद को तोड़ने के कृ’त्य को ग़ैर क़ानूनी अपरा’ध माना है। क्या दोषियों को सज़ा मिल पायेगी? देखते हैं। 27 साल हो गये।

आपको बता दें लखनऊ की एक विशेष सीबीआई अदालत में चल रहे अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढांचा गिराए जाने के आपराधिक मामले में फैसला अगले साल अप्रैल 2020 तक आने की संभावना है। विशेष सीबीआई अदालत ने अभियोजन पक्ष के लिए सबूत और गवाही पेश करने की आखिरी तारीख 24 दिसंबर तय की है।

वही 29 सितंबर 2019 को आरोप तय किए जाने के बाद अदालत के बार-बार आदेश जारी करने के बावजूद तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के खिला’फ गवाह नहीं लाने पर हाल ही में अभियोजन पक्ष को फटका’र लगाई गई थी। सीबीआई को इस मामले में 47 बीजेपी नेताओं और सैकड़ों अज्ञात कारसेवकों के खिला’फ आरोप साबित करने हैं।

बता दें कि शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में अपना फैसला सुना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन पर राम मंदिर बनेगा। उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए कानून बनाए। साथ ही सरकार तीन महीने में मंदिर को लेकर एक ट्रस्ट बनाए। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह मुस्लि’म पक्ष के लिए अलग से अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन की व्यवस्था करे।