कश्मीर मामले पर फिर बोले ट्रंप, कहा- यह मु’द्दा हिं’दू मुसलमा’न का है, और इसके लिए…

भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले को लेकर सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में इसकी चर्चा चल रही है कई सारे अलग अलग देशों से वहां के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री आदि के रोज़ नए नए बयान आ रहे हैं। आज के इस जम्मू कश्मीर के मामले को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के भी रोज़ बयान आ रहे हैं। एक बार फिर से डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बिच मध्य़स्थ’ता बनने की इक्षा जताई है और इसी के चलते हाल ही में आये ट्रंप के बयान ने अब एक नए विवा’द को जन्म दे दिया है।

हाल ही में ट्रंप द्वारा दिए गए बयान में कहा की कश्मीर का विवाद धर्म को लेकर है और मुद्दा हिंदू मु’सलमा’न का है। ट्रंप ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी से इस मामले में खुद बात करेंगे और उनके सामने यह मु’द्दा उठाएंगे ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से कश्मीर को लेकर चल रहे आपसी तनाव को काम करने का अनुरोध किया था ट्रंप ने कहा कश्मीर बेहद जटिल जगह है यहां हिंदू हैं और मुसलमा’न भी और मैं नहीं कहूंगा कि उनके बीच काफी मेलजोल है. मध्यस्थता के लिए जो भी बेहतर हो सकेगा, मैं वो करूंगा।

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ट्रंप ने ट्वीट कर कश्मीर के हालात गंभी’र बताये हैं और कश्मीर को लेकर चल रहे भारत और पाकिस्तान के बिच तनाव को लेकर ट्रंप ने 19 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी से बात की उसके बाद फिर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से बात की थी और इमरान खान से भारत के खिलाफ संभल कर बयानबा’जी करने को कहा था।

वहीँ पिछले महीने ट्रंप ने एक दावा किया था जिसने खूब बवा’ल मच गया था इमरान खान के साथ एक बैठक के दौरान ट्रंप ने उनसे एक दावा किया था कि मोदी और मैंने पिछले महीने जापान के ओसाका में जी-20 शिखर सम्मेलन में कश्मीर मु’द्दे पर चर्चा की थी जहां मोदी ने मुझसे कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता बनने की पेशकश की थी।

ट्रंप ने कहा मैं दो सप्ताह पहले पीएम मोदी के साथ था और हमने कश्मीर मुद्दे पर बात की थी और उन्होंने वास्तव में मुझसे कहा क्या आप मध्यस्थता या मध्यस्थ बनना चाहेंगे? मैंने कहा कहां? मोदी ने कहा कश्मीर इससे पहले अमेरिका के एक वरिष्ठ राजनयिक ने कश्मीर मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की मध्यस्थता से इनकार करते हुए कहा था कि जम्मू कश्मीर पर भारत सरकार ने हाल में जो फैसला लिया है वह उसका आंतरिक मामला है।

वरिष्ठ राजनयिक अधिकारी ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि हम मानते हैं कि यह कश्मीर पर भारत का फैसला उनका आंतरिक मामला है लेकिन जाहिर है इसका भारत की सीमा के बाहर भी प्रभाव पड़ेगा हम लंबे समय से दशकों के इस मुद्दे को सुलझाने के लिये भारत और पाकिस्तान को सीधी बातचीत की सलाह दे रहे हैं।

आपको बता दें कि भारत ने इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मजबूती के साथ यह बात कही है कि संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाकर जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को वापस लेना यह उसका आंतरिक मामला है। इसको इस तरह से पूरी दुनिया भर में उछाला न जाये और यह हक़ीक़त पकिस्तान भी जितनी जल्दी स्वीकार करले अच्छा है।