डॉ. कफील खान ने लगायी PM मोदी से गुहार, कहा- कोरोना की महामारी से जूझ रहे लोगों की सेवा करने के लिए….

कोरोनावायरस से इस वक़्त पूरी दुनिया जूझ रही है. अभी तक इस बीमारी का कोई पुख्ता इलाज नहीं मिल सका है. हालांकि इस दौरान कई मीडिया चैनल, और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सएप और फेसबुक के जरिए लोगों द्वारा इस बीमारी से बचने के दावे किए जा रहे हैं, तो कोई घरेलू नुस्खे बता रहा है.

आपको याद होगा कि डॉ कफील खान जोकि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मासूम बच्चों की मौ’त की घट’ना के बाद से देशभर में जाने गए थे. डॉ कफील खान को फ़िलहाल, योगी सरकार पर निशाना साधने के चलते रासुका लगाकर जेल के अंदर डाल दिया गया है.

वर्तमान हालातों की गंभीरता को देखते हुए, डॉ कफील खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है, कि मुझे सिर्फ उतने टाइम तक के लिए लोगों की सेवा के लिए बाहर आने दें, जब तक यह कोरोना की बीमारी खत्म नहीं हो जाती है.

उन्होंने भारत सरकार को भी इस बीमारी से निपटने के लिए कई सुझाव दिए हैं, जो इस महामारी से लड़ने में कारगर साबित हो सकते हैं. डॉ. कफील खान ने चिकित्सा के क्षेत्र में 100 से भी ज्यादा फ्री केम्प लगाए हैं.

उन्होंने इन फ्री केम्पों के ज़रिये, अलग-अलग क्षेत्रों में 50 हज़ार से भी ज्यादा लोगों के इलाज के जांच के दौरान अनुभव लिया है. और प्रधानमंत्री मोदी को लिखी चिट्ठी में भी इसका ज़िक्र किया है.

डॉ कफील खान लिखते हैं, हमारी मेडिकल प्राथमिकता सेवा पूरी तरह से चरमराई हुई हैं. मुझे लगता है कि मैं ऐसे समय में इस बीमारी को रोकने में कुछ मदद कर सकता हूँ. मुझे उस वक्त तक बाहर रहने के लिए जमानत दे दी जाए जब तक यह बीमारी चल रही है.

मैं अपने देश के बीमार लोगों की सेवा करना चाहता हूँ. दोस्तों आपको बता दें कि, डॉ कफील खान ने इससे पहले कई बार फ्री कैंप लगाकर जरूरतमंदों का इलाज किया है, हालांकि कुछ गलतियां उनसे हुई है लेकिन जिस तरह से उनको जेल में डाल कर रखा गया है.

एक बात यह भी है कि अगर डॉक्टर कफील खान जमानत पर रिहा होकर बाहर आते हैं, तो लोगों को पूरा यकीन है कि वह कोरोना वायरस से लड़ने में अपनी जी जान लगा देंगे. सोशल मीडिया पर भी काफी लंबे समय से उनको रिहा करने के लिए लोग गुहार लगा रहे हैं.

फिलहाल अब देखना यह है कि डॉ कफील खान के, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिठ्ठी भेजने के बाद  प्रधानमंत्री मोदी या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं.