मिसाइल मैन डॉ. अब्दुल कलाम ने रखी थी चंद्रयान-2 की नींव, आज पूरा हुआ सपना तो लोगों ने…

श्रीहरिकोटाः चंद्रमा के अनछुए पहलुओं का पता लगाने के लिए चंद्रयान-2 सोमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र एसडीएससी से रवाना हो गया है इसे बाहुबली नाम के सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी-एमके III एम-1 के जरिये इसे प्रक्षेपित किया गया 43.43 मीटर लंबे जीएसएलवी-एमके III एम-1 ने दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर उड़ान भरी और प्रक्षेपण के करीब 16 मिनट बाद 3,850 किलोग्राम वजनी चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया।

चंद्रयान-2 के पृथ्वी की कक्षा में स्थापित होने के साथ ही इसने भारत के महत्वाकांक्षी मिशन के पहले चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया. कुल 3,850 किलोग्राम वजनी यह अंतरिक्ष यान ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर के साथ गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने कहा कि ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर के साथ गया चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरने से पहले 15 महत्वपूर्ण अभियान चरणों से गुजरेगा यान के सितंबर के पहले सप्ताह में चांद पर उतरने की उम्मीद है।

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बता दें अंतरिक्ष की दुनिया में हिंदुस्तान ने आज एक बार फिर इतिहास रच दिया है। ये हिंदुस्तान का दूसरा सबसे बड़ा मिशन है। इस मिशन के बाद सबको कलाम साहब याद आ रहे हैं। लोग सोशल मीडिया पर कलाम साहब को याद कर रहे हैं। आपको बता दें कि कलाम साहब ने ही 2009 में इस चंद्रयान की नींव रखी थी। उन्होंने ही ISRO के वैज्ञानिकों को चंद्रयान-2 मिशन पर काम शुरू करने के लिए कहा था। लेकिन अफ़सोस Missile Man कहे जाने वाले डॉ. अब्दुल कलाम साहब आज हमारे बीच नहीं है।

बधाइयों का लगा तांता

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO का दूसरा मून मिशन Chandrayaan-2 सफलतापूर्वक लॉन्च को लेकर इजरायल ने भी शुभकामनाएं दी हैं। इजरायल ने ट्वीट करके कहा है कि भारत को चंद्रयान-2 मिशन के लिए बधाई। हम भी आपको पीछे पीछे हैं।

वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है. चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण से आज पूरा देश गौरवान्वित है. मैंने थोड़ी देर पहले ही इसके लॉन्च में निरंतर तन-मन से जुटे रहे वैज्ञानिकों से बात की और उन्हें पूरे देश की ओर से बधाई दी।

वही राष्ट्रपति कोविन्द ने अपने संदेश में चंद्रयान-2 टीम की सफलता की कामना करते हुए कहा कि चंद्रयान-2 अब से लगभग 50 दिनों में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के करीब उतरने वाला पहला अंतरिक्ष-यान होगा. आशा है यह मिशन नई खोजों को जन्म देगा और हमारी ज्ञान प्रणालियों को समृद्ध करेगा।