तिहा’ड़ के खूं’खार कैदि’यों संग आपकी छुट्टियां मनाने का सपना हुआ साकार, अब आप भाई जा सकते है

एशिया की सबसे बड़ी जेल तिहा’ड़ में बंद कुख्या’त अ’परा’धी और सजायाफ्ता कैदि’यों के साथ आप एक दिन रुककर जेल के अंदर उनके व्यवहार और उनकी दिनच’र्या का वास्तविक अनुभव लेना चाहते हैं या उनकी दिनचर्या को जानने के लिए उत्सुक हैं तो अब आपका यह सपना हो सकता है पूरा| अब आप भी अपनी इक्षा अनुसार तिहा’ड़ जे’ल के खतरना’क कैदि’यों के साथ रहकर उनकी दिनच’र्या का अनुभव ले कर सकते हैं जिसके चलते सरकार ने अब एक ऐसी योजना निकाली है जिससे आप अपनी इस इक्षा को पूरा कर सकते हैं|

आपको बता दें कि दिल्ली के तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने एक ऐसी योजना बनाई है, जिसमें आप जेल के अंद’र पैसे देकर एक दिन इन कैदि’यो के साथ रह सकते हैं। इस योजना के मुताबि’क़ आपके अंदर रहने का शुल्क लगभग दो हजार रुपए तक हो सकता है।

साथ ही इस योजना के मुताबिक आपको जेल के अंदर जेल से मिले कपड़े पहनने होंगे और जेल का ही भोजन करना होगा। कैदियों के साथ रहने के दौरान उन्हीं की तरह फर्श पर सोना होगा। साथ ही आप उनकी तरह सुबह ज’ल्दी उठकर काम कर सकते हैं, योग कर सकते हैं, लेकिन आपको अपने मोबाइल फोन का प्रयोग करने की छूट बिल्कु’ल नहीं होगी। सुरक्षा कारणों से फोन का प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक़ 16000 कैदि’यों के लिए बनी और 400 एकड़ में फैली तिहा’ड़ जेल देश की सबसे अधिक भी’ड़ वाली जे’ल है। यहां इंडियन मुजाहिदिन का संस्थापक पाकिस्तानी आ$तं’की भटकल, छोटा राजन से लेकर गैंगस्ट’र नीरज बावना और माफिया डॉन से नेता बने शहाबुद्दीन तक मौजूद हैं। साथ ही कुख्यात सीरियल किलर चार्ल्स शोभराज भी यहां रह चुका है।

जानकारी के लिए बता दें कि ऐसी ही योजना तेलंगाना के 220 साल पुरानी संगारे’ड्डी जेल में फील द जे’ल नाम से पहले से चल रही है। यहां पर कई विदेशी पर्यटक 500 रुपए देकर इस योजना के तहत कैदि’यों के साथ अपना समय बिता चुके हैं। हालांकि अब उस जेल को संग्रहालय में बदल दिया गया है।

वहीँ दूसरी और जेल में कैदियों के साथ समय गुज़ार’ने वाली योजना में सुझाव दिया गया है कि यहां एक बड़ा कॉम्पलेक्स बनाया जाए साथ ही उसमें फां’सीघर भी हो। इसमें सुरक्षा संबंधी सभी मानकों को पूरा किया जाए। कैदि’यों के साथ रहने के दौरान आगंतुकों को कोई विशेष सुविधा का लाभ उठा’ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यह जे’ल के अंदर वास्तविक जीवन का अनुभव करने जैसा है, न कि पर्यट’न करने जैसा होना चाहिए।

साभारः #Jansatta