जब दुनिया भर के मुस्लिम देश तुर्की के साथ ‘एकजुट’ होंगे तो मुसलमानो का कोई कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा: एर्दोगान

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोगान ने बहुत ही कम समय में दुनिया भर में अपनी खास पहचान बना ली है. एर्दोगान दुनिया के एक पहले ऐसे मुस्लिम राष्ट्रपति है जिन्होंने अंतररास्ट्रीय स्तर पर इतनी ख्याति प्राप्त की है. तुर्की राष्ट्रपति एर्दोगान हमेशा से ही खुलकर मुस्लिमों का साथ देते रहे है यही कारण है कि उन्हें कई लोग मुस्लिमों का खलीफा भी कहते है. दुनिया के किसी भी कोने पर जब भी मुसलमानों को संकट आता है तो वह एर्दोगान ही होते है जो सबसे पहले मुस्लिमों के साथ खड़े हुए नजर आते है.

न्यूजीलैंड में दो मस्जिदों पर हम’ले में करीब 50 मुस्लिमों की मौ’त के बाद एर्दोगान ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए शोक जाहिर किया था. इसके बाद अब तुर्की राष्ट्रपति ने मुस्लिमों को एक होकर के लिए कहा है. इस मौके पर उन्होंने अपने देश की एकता की बात भी कही.

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उन्होंने देश की एकता पर जोर देते हुए कहा कि तुर्की समाज के सभी वर्ग एक साथ आए हैं और एक साथ है. एर्दोगान ने स्पष्ट किया कि तुर्की मजबूत है और जो इसे विभाजित करना चाहते हैं वे विफल होते रहे है. उन्होंने कहा कि हमारे एकता, एकजुटता और भाईचारे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

सोमवार को एर्दोगान ने पश्चिमी प्रांत ओनाक्केल में तुर्की युद्ध के एक स्मारक समारोह में भाग लिया इसी दौरान उन्होंने यह बात कही. युद्ध की 104 वीं वर्षगांठ थी जब प्रथम विश्व यु’द्ध के दौरान ओटोमन तुर्की सैनिकों ने कब्जे वाली ताकतों को रोकने में कामयाबी हासिल की थी.

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यह एक ऐसा कदम था जिसने ओटोमन साम्राज्य के पतन में देरी की और आजादी के बाद की डब्ल्यूडब्ल्यूआई लड़ाई को बढ़ावा दिया. 18 मार्च को आधिकारिक तौर पर तुर्की विजय और शहीद दिवस के रूप में मानता है. इस दिन सभी गिर सैनिकों और नागरिकों को युद्ध में मा’रे गए थे.

इस दिन आतंक’वादी ह’मले और आतंक’वाद के खिलाफ किये गए अभियानों को याद किया जाता है और अपनी एकता का प्रदर्शन किया जाता है. स्मरण की घटनाओं का समापन एक राष्ट्रीय उद्यान में होता है जहां हजारों गिरे हुए कब्रिस्तान स्थित हैं और परंपरागत रूप से यहां पर एक सैन्य परेड का आयोजन भी किया जाता है.