VIDEO: हज के वक्त कुर्बानी के लिए जानवर कहाँ से लाया जाता है? और फिर उनका क्या होता है | जानिए Eid al-Adha | Bakrid 2019

हज यात्रा, यानी के मुस्लिमों की जिंदगी का एक ऐसा ख़ास मकाम जिसकी चाहत दुनिया के हर मुस्लिम के दिल में होती है. चाहे वह मर्द हो या औरत वह अपनी जिंदगी में एक बार हज पर जरूर जाना चाहता है. ‘हज’ इस्लाम के पांच सिद्धांतों में से एक है. इस्लाम धर्म के अनुसार ऐसी मान्यता है कि अगर कोई मुस्लिम आर्थिक रूप से इतना सक्षम है, कि वह हज यात्रा का खर्च वहन कर सके, उसको अपने जीवन काल में कम से कम एक बार हज करने के लिए सऊदी अरब के मक्का मदीना की जियारत ज़रूर करनी चाहिए.

जब हज करने के लिए जाते हैं, तो हज यात्रा काबे का ‘तवाफ’ करके पूरी होती है. काबे का तवाफ करना उसकी परिक्रमा करने को कहा जाता है. यानी कि जो लोग हज करने के लिए जाते हैं वह काबे के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं, और इस तरह से ये लोग हज संपन्न करते हैं. दोस्तों काबा सऊदी अरब के मक्का शहर में स्थित है.

पूरी दुनिया के मुसलमानों का सिर्फ एक ही तीर्थ स्थल है, ‘मक्का शहर’, मतलब दुनिया के किसी भी कोने से जिसको भी हज करना है, उसे मक्का आना पड़ेगा. हज करने में पूरे 5 दिन का वक्त लगता है, क्योंकि इसमें कई तरह की रस्में होती हैं, जिनको इन 5 दिनों के दौरान पूरा करना पड़ता है.

हालांकी बाकी के कुछ और दिन वहां दूसरी जगहों पर आने जाने और रुकने में लग जाते हैं. जहां पर सभी लोग जाते हैं. दोस्तों हज यात्रा को पूरा तभी माना जाता है जब हज पर गया व्यक्ति कुर्बानी देता है. मतलब जितने भी लोग हज पर जाते हैं, उनको यह करना जरूरी होता है. उन्हें अपनी तरफ से एक जानवर की कुर्बानी देनी ही होती है.

हज में जिन जानवरों की कुर्बानी दी जाती है उनमें ऊंट, भेड़ और बकरा शामिल हैं. और यह कुर्बानी ईद उल अजहा के दिन, यानी कि बकरीद के दिन दी जाती है. कुछ आंकड़ों के अनुसार साल 2015 में 15 लाख के लगभग मुस्लिम लोग दुनिया भर से हज करने के लिए गए थे. और इतने ही लोगों के द्वारा वहां कुर्बानी दी गई.

इस साल दुनियाभर से लगभग 20 लाख लोगों के हज करने की उम्मीद है. मतलब इतने ही लोगों को इस साल भी उतनी ही कुर्बानी देनी होगी. यानी कि इस साल लगभग 20 लाख जानवरों की कुर्बानी दी जाएगी.

एक शहर में 20 लाख जानवरों की कुर्बानी देना कोई छोटा-मोटा काम नहीं है, और एक ही दिन में एक ही समय में यह कैसे संभव है? और सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि इन जानवरों की कुर्बानी देने के बाद इनका क्या किया जाता है?

वैसे शरीयत के एतबार से अगर देखा जाए तो जिस जानवर की कुर्बानी दी जाती है, उसका एक हिस्सा कुर्बानी देने वाला  खुद अपने लिए रखता है, और दूसरा हिस्सा अपने रिश्तेदारों और आसपास के पहचान वाले लोगों में बांटने के लिए, और तीसरा हिस्सा उसको गरीब मजलूम, बेसहारा लोगों में बांटने के लिए होता है.

यानी कि वह सिर्फ एक हिस्सा अपने पास रख सकता है, और बाकी के दो हिस्से उसको दूसरे लोगों में तकसीम करना होते हैं. लेकिन जब एक ही जगह पर लाखों जानवर काटे जाएंगे तो कुर्बानी का एक हिस्सा ना तो कोई हाजी रख सकता है और न ही बचे हुए बाकी के दो हिस्से वहां बांटे जा सकते हैं, क्योंकि वहां कोई भी इतना गरीब नहीं है. और अगर होंगे भी तो न के बराबर.

बताया जाता है कि बहुत पहले जब हज यात्रा के दौरान कुर्बानी दी जाती थी तो उसका गोश्त और खून काफी बे तरतीबी से इधर-उधर बिखरा पड़ा हुआ रहता था, और बचे हुए जानवरों को कुर्बानी के बाद दफन करना पड़ता था. लेकिन अब ऐसा नहीं है. अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए सऊदी सरकार ने ऐसे इंतजाम कर दिए हैं जिससे किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती और सब काम एक ही दिन में बड़ी साफ़ सफाई के साथ निपट जाता है.

आज से लगभग 35 साल पहले सऊदी सरकार ने एक प्रोजेक्ट शुरू किया था जिसका नाम था ‘यूटिलाइजेशन ऑफ हज मीट’ दोस्तों इस प्रोजेक्ट के तहत कुर्बानी किए गए जानवरों के गोश्त को दूसरे मुस्लिम देशों में भेज दिया जाता है, जहां पर ज्यादा संख्या में मुस्लिम गरीब पापुलेशन होती है.

साल 2012 के आंकड़ों के अनुसार दुनिया के अलग अलग 24 देशों में लगभग 10 लाख जानवरों का गोश्त भेजा गया था, और साल 2018 में दुनिया भर के लगभग 28 देशों में कुर्बानी का गोश्त तक्सीम किया गया. बताया जाता है कि इसका सबसे बड़ा हिस्सा सीरिया भेजा गया था.

अब सऊदी अरब में ‘इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक’ खोला गया है जिसके तहत वहां से कूपन खरीदकर कोई भी हज यात्री कुर्बानी में शामिल हो सकता है. मक्का के पास में ही एक बूचड़खाना है जिसमें जानवरों की कुर्बानी दी जाती है.

उस हज यात्री को मक्का में कुर्बानी के लिए अपना जानवर चुनना होता है, जैसे वो किस जानवर की कुर्बानी करना चाहता है. फिर उसी अनुसार उसको उतनी रकम का भुगतान करना होता है. उसके बाद उसके नाम की कुर्बानी वाला जानवर कुर्बानी होने के बाद उनको मोबाइल पर टेक्स्ट मैसेज भेजकर और ईमेल के जरिए जानकारी दे दी जाती है कि आपके हिस्से की कुर्बानी हो चुकी है. तो इस तरह से होता है सऊदी अरब के मक्का में हज यात्रा के दौरान कुर्बानी का सिस्टम.

अब बात आती है कि इतने लाख जानवर एक साथ कहां से लाए जाते हैं, तो आपको बता दें दोस्तों यह दुनिया भर के कई देशों से इन जानवरों को इंपोर्ट किया जाता है, और सबसे ज्यादा जानवर को सोमाली से इंपोर्ट किया जाता है. सोमाली लैंड के लोग अधिकतर पशुपालन व्यवसाय करते हैं.

लेकिन अब ऑस्ट्रेलिया और सूडान भी बड़े पशुपालक देश बन गए हैं, इसके अलावा पाकिस्तान सहित कुछ और भी देश हैं जिनसे जानवरों को इंपोर्ट किया जाता है. तो दोस्तो आपको इस तरह से पूरी बात समझ में आ चुकी होगी ऐसे ही और इस्लाम और हज से जुड़ी जानकारी पाने के लिए आप हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए. हम आपको इसके बारे में और अपडेट देते रहेंगे आपसे अगले वीडियो में फिर मुलाकात होगी तब तक के लिए अल्लाह हाफिज.