हदीस: ये काम करके जो कोई नमाज़ के लिए घर से निकलता है तो उसको एक हज करने का सबाब…

हज़रत अबू उमामा रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया जो शख्स अपने घर से वज़ु करके फ़र्ज़ नमाज़ की नियत से निकले तो उसको उतना सवाब मिलेगा जितना की एहराम बाँध कर हज पर जाने का होता है|

और जो शख्स दूहा ईशराक या चाश्त की नमाज़ की नियत से निकले और उसकी खातिर तकलीफ़ भी बर्दाश्त करे तो उसका सवाब उमराह करने वाले की तरह है और जो नमाज़ एक नमाज़ के बाद हो और उसके बीच कोई बेहूदा बात या काम ना किया जाए तो वो नमाज़ इल्लियीन में लिखी जाएगी सुनन अबू दाऊद, जिल्द 1, 556-सही

हज़रत अबू हुरैरह रदी अल्लाहू अन्हु से रिवायत है की रसूल-अल्लाह सल-अल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया की जब तुम में से कोई शख्स अच्छी तरह वुज़ू करके नमाज़ के लिए निकलता है तो दाहिना क़दम उठाते ही अल्लाह सुबहानहु उसके लिए एक नेकी लिख देते हैं|

और बायाँ क़दम रखते ही उसका एक गुनाह माफ़ कर देते हैं सो अब जो चाहे मस्जिद से क़रीब रहे या दूर रहे , फिर जब वो मस्जिद में आकर नमाज़ पढ़ता है तो उसको बख़्श दिया जाता है| सुनन अबू दाऊद, जिल्द 1, 561-सही

अल क़ुरान : और हम ही ने इंसान को पैदा किया है और जो ख़यालात उसके दिल में गुज़रते हैं हम उनको जानते हैं और हम उसकी रग-ए-जान से भी ज़्यादा क़रीब हैं, जब वो कोई काम करता है तो दो लिखने वाले जो दायें बायें बैठे हैं लिख देते हैं , कोई बात उसकी ज़ुबान पर नही आती मगर एक निगहबान उसके पास तय्यार रहता है लिखने के लिए
सुरह क़ाफ 50, आयत 16-19

Aur hum hi ne insan ko paida kiya hai aur jo khayalat uske dil mein guzarte hain hum unko jante hain aur hum uski Rag-e-Jaan se bhi zyada qareeb hain, jab wo koi kaam karta hai to do likhne wale jo dayien bayein baithe hain likh dete hain , koi baat uski zuban par nahi aati magar ek nigehban uske paas tayyar rahta hai (likhne ke liye) Surah Qaf (50), 16-19

القرآن : اور ہم ہی نے انسان کو پیدا کیا ہے اور جو خیالات اس کے دل میں گزرتے ہیں ہم ان کو جانتے ہیں۔ اور ہم اس کی رگ جان سے بھی اس سے زیادہ قریب ہیںجب وہ کوئی کام کرتا ہے تو دو لکھنے والے جو دائیں بائیں بیٹھے ہیں، لکھ لیتے ہیں کوئی بات اس کی زبان پر نہیں آتی مگر ایک نگہبان اس کے پاس تیار رہتا ہے
سورۃ ق  آیت ۱۶-۱۹