तुर्की राष्ट्रपति एर्दोगान की इन देशों को नसीहत, तुर्की के आन्तरिक मामलों में दखल ना दें वरना भुगतना पड़ेगा

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोगान ने बहुत ही कम समय में दुनिया भर में अपनी खास पहचान बना ली है. एर्दोगान दुनिया के एक पहले ऐसे मुस्लिम राष्ट्रपति है जिन्होंने अंतररास्ट्रीय स्तर पर इतनी ख्याति प्राप्त की है. एर्दोगान की बढती लोकप्रियता कई लोगों के लिए मुश्किल बनती जा रही है यही वजह है कि तुर्की को झुकाने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं.

इस सब से इतर अमेरिका और तुर्की के रिश्तों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. हाल ही में तुर्की में स्थानीय चुनाव हुए, इसे लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है. इसी मामले को लेकर राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोगन ने शुक्रवार को पश्चिमी सत्तारूढ़ पार्टी के स्थानीय चुनाव परिणामों की चुनौती के बाद

पश्चिमी सहयोगियों के बयानों को लेकर अमेरिका और यूरोप पर तुर्की के मामलों में मध्यस्थता और दखल देने का आरोप लगाया. एर्दोगन और उनके एकेपी को रविवार के मतदान में उस समय हैरानी हुई जब परिणाम जारी हुई और नतीजों के बाद पता चला की

एर्दोगान की सत्ताधारी पार्टी ने राजधानी अंकारा में अपना शासन खो दिया और इस्तांबुल जो देश का सबसे बड़े शहर और आर्थिक हब के तौर पर जाना जाता है उसे वहां भी हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद से ही सत्ताधारी परिणामों को स्वीकार करने को लेकर असंजस में आ गया.

इसी बीच संयुक्त राज्य अमेरिका ने एर्दोगान की पार्टी को परिणामों को स्वीकार करने के लिए कहा. यूरोपीय संघ ने अंकारा से निर्वाचित अधिकारियों को अपने जनादेश का स्वतंत्र रूप से अभ्यास करने का आग्रह किया और उन्हें शुभकामनाएं दी.

लेकिन राष्ट्रपति एर्दोगन ने अमेरिका द्वारा की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताई. एर्दोगन ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका और यूरोप तुर्की के आंतरिक मामलों में ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. बेहतर होगा वह हमारे मामलों में दखल न दें.