VIDEO: NDTV Exclusive, यूरोपीय सांसदों ने दौरे के बाद चुनिंदा मीडिया को संबोधित किया: भारत सरकार को दिया पूरा…

नई दिल्ली/श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर दौरे पर आये यूरोपियन यूनियन के 27 सांसदों के दौरे का आज दूसरा और आख़िरी दिन है। यूरोपीय सांसदों ने घाटी दौरे के बाद श्रीनगर में चुनिंदा मीडिया को संबोधित किया जिसमें स्थानीय कश्मीरी मीडिया सहित कई अखबारों को बाहर रखा गया था। जिसमें मंगलवार को डल झील डल झील पर शिकारा की सवारी शामिल थी, क्योंकि वे भारी सुरक्षा के बीच जम्मू और कश्मीर का दौरा कर रहे थे। यह पहली बार है जब जम्मू-कश्मीर में किसी अंतरराष्ट्रीय टीम को वहाँ का दोरा करने की अनुमति दी गई है।

आपको बता दें केंद्र सरकार ने अपनी विशेष स्थिति को समाप्त करते हुए 5 अगस्त को इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाट दिया। जिसका 2 महीने से भी ज्यादा वक्त होने के बाद मंगलवार को कश्मीर का दौरा करने वाला यह पहला अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल है. इस प्रतिनिधिमंडल में दक्षिणपंथी पार्टियों के नेता शामिल हैं, जिनमें से चार सदस्य ब्रिटेन की ब्रेक्सिट पार्टी से थे।

वही अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के कश्मीर दौरे को लेकर सरकार के इस फैसले से विपक्ष ने सवाल उठाया है कि जब भारत में राजनेताओं को इस अवसर से वंचित कर दिया गया है तो राज्य में विदेशी सांसदों को कैसे अनुमति दी गई है। वही न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत में कुछ सांसदों ने माना कि कश्मीर में कुछ तनाव है लेकिन साथ ही उम्मीद जताई कि सरकार इससे निपट लेगी।

यूरोपीय सांसदों का ये भी कहना था कि जब उन्हें विदेश से कश्मीर आने की इजाज़त दी गई तो देश के विपक्षी सांसदों को भी वहाँ जाने की इजाज़त मिलनी चाहिए. इससे पहले ये दौरा सवालों में आ गया जब 27 में से चार सांसद कश्मीर नहीं गए. कश्मीर के कई नेताओं ने शिकायत की, कि उन्हें इस समूह से मिलने नहीं दिया गया।

आपको बता दें कश्मीर नहीं जाने वाले सांसदों की शिकायत थी कि उन्हें हालात समझने की खुली छूट नहीं दी जा रही थी. सवाल इस पर भी उठ रहा है कि इन सांसदों में ज़्यादातर दक्षिणपंथी रुझान वाले हैं. NDTV की खबर के मुताबिक़ वीसिट यानी विमिंज इकनॉमिक ऐंड सोशल थिंक टैंक NGO से मादी शर्मा ने ईमेल भेजकर EU सांसदों को घाटी के दौरे का न्योता दिया था।

जिसपर पर सांसद क्रिस डेविस ने कहा, की मैंने इस शर्त पर कश्मीर जाने के निमंत्रण को स्वीकार किया था कि जहां भी मैं जाना चाहूंगा वहां मुझे बेरोक-टोक जाने दिया जाएगा. मैं जिससे भी बात करना चाहूंगा उससे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र होऊंगा. मेरे साथ सेना, पुलिस, सुरक्षाकर्मी कोई नहीं होंगे, सिर्फ पत्रकार हो सकते हैं।

वही डेविस ने कहा, ऐसा क्या है, जिसे भारत सरकार को छिपाना पड़ रहा है? सरकार पत्रकारों और नेताओं को स्थानीय लोगों के साथ बात करने की इजाजत क्यों नहीं दे रही?’ भारत सर्कार द्वारा सैन्य शासन लागू करना कश्मीरी लोगों का दिल नहीं जीत सकता और उनसे उनकी आजादी नहीं छीन सकता. मुझे डर है कि यह सही तरह से खत्म नहीं होने वाला है।

आज श्रीनगर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इन सांसदों ने कहा है कि उनका भारत की आंतरिक राजनीति से कोई लेनादेना नहीं है और वे इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं. हमें आ’तंक’वादि’यों द्वारा की जा रही हैं ह’त्या’ओं पर दुख हो रहा है. हम यहां तथ्यों को जानने आए हैं. सांसदों ने कश्मीर की जनता से कहा कि वे उनके दोस्त हैं. और वे यहां कश्मीरियों की समस्याओं को समझने आए हैं।

आपको बता दें यूरोपीय सांसदों ने बुलेट-प्रूफ वाहनों में सुरक्षा काफिले के साथ यात्रा की, उन्हें श्रीनगर के हवाई अड्डे से मंगलवार को शहर के एक लक्जरी होटल में ले जाया गया। कानून बनाने वाले मुख्य रूप से दक्षि’णपं’थी पार्टियों से हैं। 27 में से केवल तीन सांसद वा’मपंथी या उ’दारवा’दी दलों के हैं। ये सभी अपनी निजी क्षमता में भारत का दौरा कर रहे हैं।

 

हलाकि कई लोगों ने आरोप लगाया कि कोई भी प्रमुख नागरिक समाज समूह, व्यापार मंडल या मुख्यधारा का कश्मीरी राजनीतिक दल यूरोपीय संघ के सांसदों से नहीं मिल सका। नेशनल कॉन्फ्रेंस के दो सांसदों ने कहा कि उन्हें समूह से मिलने से रोक दिया गया था। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किसी को भी उनसे बात करने या कोई सवाल करने की अनुमति थी।

आपको बता दें 27 यूरोपीय सांसदों में से चार सांसद इस यात्रा से बाहर हो गए और वापस अपने देशों के लिए रवाना हो गए। यूके एमपी क्रिस डेविस ने दावा किया कि उन्हें यात्रा से हटा दिया गया था क्योंकि उन्होंने निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए कश्मीर में लोगों और स्थानों पर अनैतिक पहुंच के लिए कहा था।

वही लिबरल डेमोक्रेट सांसद ने कहा, की मैं मोदी सरकार के लिए एक पीआर स्टंट में भाग लेने के लिए तैयार नहीं हूं और यह दिखावा करता हूं कि सब ठीक है। यह बहुत स्पष्ट है कि कश्मीर में लोकतांत्रिक सिद्धांतों को तोड़ दिया जा रहा है, और दुनिया को नोटिस शुरू करने की जरूरत है।

साभार: #NDTVIndia