अब महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर, फडणवीस को पड़ सकती है ओवैसी की जरूरत

महाराष्ट्र में हर बीतते दिन के साथ सियासी ड्रामा बढ़ता जा रहा है। अब राज्य में नए नए समीकरण देखने को मिल रहे है। रातोंरात शिवसेना,एनसीपी और कांग्रेस की तिगड़म को चुनौती देकर बीजेपी ने सरकार तो बना ली है, लेकिन अभी अग्निपरीक्षा बाकी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को गवर्नर ने फ्लोर टेस्ट के लिए 30 नवंबर तक का समय दिया गया है, लेकिन तीनों दलों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए 24 घंटों के अंदर बहुमत साबित करने की चुनौती दी है। ऐसे में बहुमत के लिए निर्दलीय विधायकों और छोटे मोटे दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

आपको बता दें महाराष्ट्र विधानसभा में 288 सीट हैं। और सरकार बनाने के लिए 145 विधायकों का समर्थन चाहिए। भाजपा के पास 105 विधायक हैं। भाजपा का दावा है कि निर्दलीय व अन्य 11 विधायकों का उन्हें समर्थक है। यानी उनके पास 116 विधायकों का समर्थक है। वही अजित पवार का समर्थन मिलने पर भाजपा ने दावा किया कि उनके पास पूर्ण बहुमत है, इसलिए अब उनकी सरकार को खतरा नहीं है।

अगर भाजपा बहुमत साबित नहीं कर पाती, तब शिवसेना-राकांपा और कांग्रेस मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। आपको बता दें शिवसेना के 56, एनसीपी के 54 और कांग्रेस के 44 विधायक हैं। तो इन तीनों को मिलाकर 154 विधायक हो रहे हैं, जो बहुमत साबित करने से 9 ज्यादा है। कांग्रेस व राकांपा के साथ अन्य दलों के विधायक भी हैं।

बहुमत के लिए न्यूनतम 145 विधायक की जरुरत है और बीजेपी के पास अपने 105 विधायकों के अलावा अजित पवार के साथ आए कुछ एनसीपी विधायकों का समर्थन है ऐसे में बीजेपी के लिए 40 विधायकों का बंदोबस्त करने एक बड़ी चुनौती है। वही राज्य में शिवसेना और कांग्रेस को छोड़कर एनसीपी के संख्याबल पर स्थिति स्पष्ट नहीं है क्योंकि कुल 54 विजेता विधायक दो खेमों में बंट चुके हैं।

वही बचे हुए 29 विधायकों में से 13 निर्दलीय हैं। बचे 16 में से दो विधायक असदुद्दीन ओवैसी और समाजवादी पार्टी के पास 2-2 विधायक हैं, जबकि सीपीएम और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के पास एक-एक विधायक हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक 11 निर्दलीय विधायक बीजेपी को समर्थन का ऐलान कर चुके हैं।

वही महाराष्ट्र की कश्मकश की स्थिति में सपा, सीपीएम और ओवैसी का समर्थन दोनों खेमों के लिए बेहद अहम होगा। सपा के प्रदेश प्रमुख अबु आजमी ने कहा है, हमारा मकसद बीजेपी को सत्ता से दूर रखना है, इसीलिए शिवसेना को समर्थन दिया है। ओवैसी दोनों खेमों से दूर रह सकते हैं। पार्टी के विधायक इम्तियाज जलील ने कहा, चारों दल हमसे संपर्क की कोशिश कर रहे है।